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अवसाद दूर करने की 'कसरती' गोली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों का कहना है कि डिप्रेशन यानी अवसाद दूर करने में नियमित कसरत जितनी असरदार होती है, जल्द ही वही लाभ दवा की एक गोली से हो सकेगा. येल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि चूहों पर किए प्रयोग से पता चला है कि नियमित व्यायाम से अवसादग्रस्त लोगों को मदद मिलती है. ‘नेचर मेडिसिन’ में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नतीज़े से कारगर दवा तैयार करने में सहायता मिलेगी. ब्रिटेन की मानसिक स्वास्थ्य चैरिटी पहले ही अवसादग्रस्त लोगों के लिए व्यायाम करने की सलाह का समर्थन कर चुकी हैं. शोध की ज़रूरत हालाँकि यह सभी जानते हैं कि नियमित व्यायाम से ‘मूड’ भी अच्छा रहता है, लेकिन इसकी वजह क्या है, यह अभी तक पता नहीं चल सका है. मस्तिष्क के एक ख़ास हिस्से ‘हिप्पोकैंपस’ पर किए गए ताज़ा शोध से भी पता चला है कि अवसाद दूर करने के लिए दी जाने वाली दवाओं का लक्ष्य भी यही होता है. वैज्ञानिकों ने ये पता लगाने की कोशिश की कि व्यायाम के दौरान ऐसे कौन से जीन होते हैं, जो ज़्यादा सक्रिय हो जाते हैं. यह शोध वैज्ञानिकों के उस सिद्धांत को भी मज़बूती देता है जिसके मुताबिक अवसाद दूर करने के लिए सिर्फ़ मस्तिष्क कोशिकाओं में रासायनिक बदलाव काफ़ी नहीं हैं, बल्कि कोशिकाओं की संरचना और उनके आपसी संबंधों में बदलाव भी ज़रूरी है. वैज्ञानिकों का अगला क़दम अब यह रसायन तैयार करना और इसे चूहों पर आजमाना होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें कई गंभीर बीमारियों के जीन मिले06 जून, 2007 | विज्ञान तनाव मारता है दिमाग़ की कोशिकाएँ14 मार्च, 2007 | विज्ञान ठंड में कश्मीरियों में अवसाद ज़्यादा09 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान 'धूम्रपान और मदिरापान के फ़ायदे भी हैं'20 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान लंबी उंगलियों वाले होते हैं आक्रामक08 मार्च, 2005 | विज्ञान चाय में चीनी या नमक, भला क्यों?21 दिसंबर, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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