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'धूम्रपान और मदिरापान के फ़ायदे भी हैं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक अध्ययन के अनुसार जो लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ख़तरे उठाते हैं जैसे धूम्रपान या मदिरापान करते हैं उन्हे पार्किन्संस बीमारी होने की संभावना कम होती है. लंदन विश्वविद्यालय के नेतृत्व में एक दल ने 212 लोगों से पूछताछ की जिनमें से आधे लोग पार्किन्सन्स बीमारी के शिकार थे और पाया कि जो धूम्रपान या मदिरापान करते हैं वो इस बीमारी से सुरक्षित रहते हैं. शायद इसलिए क्योंकि उनके शरीर को ख़तरे उठाने की आदत है. पार्किन्संस बीमारी के विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन के नतीजों को सावधानी पूर्वक देखा जाना चाहिए. पार्किन्सन्स रोग पार्किन्संस एक दिमाग़ी बीमारी है जो बड़ी उम्र के लोगों में अधिक पाई जाती है और इससे हमारी शारीरिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं. इस रोग के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन इसे अकसर मस्तिष्क के एक रसायन डोपेमीन की कमी से जोड़ा जाता है जो स्नायु कोशिकाओं के बीच के संबंधों को नियंत्रित करता है. यह कहा जाता है कि डोपेमीन निकोटीन और कैफ़ीन से सुरक्षित रहता है. इस अध्ययन का नेतृत्व कर रहे प्रोफ़ैसर ऐन्ड्रू लीस कहते हैं, "अगर आपने कभी धूम्रपान नहीं किया है तो आपको पार्किन्सन्स बीमारी होने का ख़तरा दोगुना हो जाता है लेकिन क्यों इसका जवाब हमारे पास नहीं है." इस अध्ययन ने पाया कि पार्किन्संस के रोगियों ने धूम्रपान, मदिरा पान और चाय कॉफ़ी का सेवन कम किया. ये लोग उत्तेजना की तलाश और ख़तरे उठाने में भी पीछे पाए गए और इनमें चिंता और अवसाद भी अधिक पाया गया. शायद इसीलिए अध्ययन करने वाले दल को लगा कि उत्तेजना से दूर रहने वालों और पार्किन्संस बीमारी में कोई संबंध है. अविश्वसनीय लेकिन पार्किन्संस डिज़ीज़ सोसाइटी के शोध निदेशक कीरन ब्रीन का कहना है कि ऐसे अध्ययनों के आधार पर कार्य-कारण निकालना विश्वसनीय नहीं होता. उन्होने कहा, "डोपेमीन का स्तर शारीरिक गतिविधियों में परेशानी पैदा होने और पार्किन्संस बीमारी के निदान से कई साल पहले घटना शुरु हो जाता है. इसलिए यह तर्क कि जोखिम उठाने वाले लोगों को पार्किन्संस बीमारी कम होती है दोषपूर्ण है." इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइकाइट्री में शोध मनोवैज्ञानिक डॉ पॉल विक्स कहते हैं, "यह अध्ययन रोचक है लेकिन इस पर दीर्घकालिक शोध करना ज़रूरी है". उन्होंने कहा, "भले ही धूम्रपान और मदिरा पान से लोगों को सुख मिलता हो लेकिन निकोटीन, अल्कोहल और कैफ़ीन से स्वास्थ्य को ढेरों ख़तरे भी हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें धूम्रपान न करने वाले ज़्यादा जीते हैं22 जून, 2004 | विज्ञान मोटापा और धूम्रपान से जल्दी होंगे बूढ़े14 जून, 2005 | विज्ञान सिर्फ़ कुछ सिगरेट भी ख़तरनाक22 सितंबर, 2005 | विज्ञान अप्रत्यक्ष धूम्रपान से आँख को ख़तरा21 दिसंबर, 2005 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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