|
तनाव मारता है दिमाग़ की कोशिकाएँ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में हुए एक शोध में कहा गया है कि तनाव का एक बड़ा झटका भर ही दिमाग़ की नई कोशिकाओं को बड़ा नुक़सान पहुँचा सकता है. रोज़लिंड फ्रैंकलिन विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं का मानना है कि उनके निष्कर्षों से 'डिप्रेशन' के इलाज में मदद मिल सकती है. चूहों पर किए गए परीक्षण में उन्होंने पाया कि दिमाग़ के हिप्पोकैम्पस नामक एक हिस्से में कोशिकाओं का क्षय हो गया था. दिमाग़ का यह हिस्सा सीखने, याद रखने और भावनाओं से संबंधित होता है. चूहों और मनुष्य दोनों में हिप्पोकैम्पस दिमाग़ का वह हिस्सा होता है जहाँ जीवन भर नई कोशिकाओं का बनना जारी रहता है. शोधकर्त्ताओं ने पाया कि छोटे चूहों में बड़े और आक्रामक चूहों से सामना होने की चिंता से नई कोशिकाओं का बनना बंद तो नहीं हुआ लेकिन उनका ज़्यादा देर टिका रहना मुश्किल हो गया. इसकी वजह से उनमें भावनाओं को समझ पाने की क्षमता पर असर पड़ा. शोधकर्त्ताओं का मानना है कि इन कोशिकाओं को नुक़सान पहुँचना डिप्रेशन या अवसाद का एक कारण हो सकता है. उनका कहना है कि ये कोशिकाएँ किसी तनावपूर्ण स्थिति के तुरंत बाद नहीं मरती बल्कि इसमें 24 घंटे या इससे अधिक समय लगता है. इस शोध के बाद तनाव और अवसाद से होने वाले दिमाग़ी समस्याओं के इलाज के नए संभावित उपचारों की उम्मीद जागी है. उनका मानना है कि इन कोशिकाओं के ख़त्म होने के दौरान ही इसका इलाज कर इन कोशिकाओं को मृत होने से बचाया जा सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें दबाव से बढ़ सकता है रक्तचाप01 जुलाई, 2006 | विज्ञान माँ चिंतित तो बच्चा चिंतित28 सितंबर, 2005 | विज्ञान तनाव कील-मुँहासे बढ़ाता है23 जुलाई, 2003 | विज्ञान तनाव सेहत के लिए अच्छा हो सकता है!06 जुलाई, 2004 | विज्ञान तनाव भगाने के लिए तोड़फोड़ का सहारा23 नवंबर, 2004 | विज्ञान 24/7 जीवन शैली के ख़तरनाक प्रभाव08 सितंबर, 2006 | विज्ञान मोबाइल फोन बढ़ाता है ब्लड प्रेशर14 सितंबर, 2006 | विज्ञान नींद पूरी ना होय तो...10 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||