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नींद पूरी ना होय तो... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हममें से अक्सर बहुत से लोग नींद पूरी नहीं होने जैसे संवेदनशील मामले को बहुत हल्का-फुल्का समझ लेते हैं लेकिन नए शोध में पाया गया है कि नींद पूरी नहीं होने का असर दिमाग़ पर पड़ सकता है. दिमाग़ पर इस रूप में कि अगर कोई व्यक्ति पूरी नींद नहीं सो पाता है तो उसके मस्तिष्क में वे सेल्स बनने से रुक सकते हैं जो स्मृतियाँ जीवित रखने में मदद करते हैं. अमरीका के प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चूहों पर एक अध्ययन किया और पाया कि नींद की कमी की वजह से मस्तिष्क में उस हिस्से में सेल्स बनने रुक जाते हैं जो याद या स्मृति बनाने में मदद करता है. शोध के नतीजे प्रोसीडिंग्स ऑफ़ नेशनल एकेडेमी ऑफ़ साइंस में प्रकाशित हुए हैं. इन नतीजों में कहा गया है कि नींद पूरी नहीं होने की वजह से शरीर और मस्तिष्क पर जो दबाव पड़ता है उसकी वजह से कुछ सेल्स बनने रुक जाते हैं. ब्रिटेन के एक वैज्ञानिक का कहना था कि यह जानना दिलचस्प होगा कि क्या रात भर नहीं सो पाने का भी क्या उतना ही असर होता है जितना कि कम नींद ले पाने का. शोधकर्ताओं ने ऐसे जानवरों पर अध्ययन किया जिन्हें 72 घंटे तक नींद से वंचित रखा गया, जबकि कुछ जानवरों को नींद पूरी करने का मौक़ा दिया गया. जिन जानवरों को सोने का मौक़ा नहीं दिया गया उनमें दबाव या स्ट्रैस पैदा करने वाला रसायन ज़्यादा मात्रा में पाया गया. उनके मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस हिस्से में पाया गया कि वहाँ नए सेल्स कम बन रहे हैं और मस्तिष्क का यही हिस्सा यादें या स्मृतियाँ बनाने का काम करता है. इन नतीजों से पता चलता है कि नींद पूरी नहीं होने की वजह से थकान वाला रसायन बढ़ता है और वही किसी वयस्क व्यक्ति के दिमाग़ में यादें या स्मृतियों संबंधी सेल्स बनने से रोकता है. उन चूहों को एक सप्ताह बाद ही सामान्य रूप से नींद पूरी करने की इजाज़त दे दी गई थी लेकिन फिर भी सेल निर्माण की प्रक्रिया दो सप्ताह तक शुरू नहीं हो सकी थी और ऐसा लगा कि ये सेल्स बनाने के लिए दिमाग़ को ख़ासी कसरत करनी पड़ी. इस शोध में बताया गया है कि जो लोग पूरी नींद नहीं सो पाते हैं तो उन्हें एकाग्रता यानी ध्यान केंद्रित करने और दूसरी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. | इससे जुड़ी ख़बरें कम सोने से बढ़ता है वज़न 25 मई, 2006 | विज्ञान नींद बेचने की नई दुकान19 अगस्त, 2004 | विज्ञान दिमाग़ की घड़ी कैसे चलती है भला05 मई, 2004 | विज्ञान कड़े बिस्तर से फ़ायदा नहीं15 नवंबर, 2003 | विज्ञान जैसा सोए, वैसा होए16 सितंबर, 2003 को | विज्ञान सपने तो आते ही रहते हैं28 जून, 2003 | विज्ञान नींद या झपकी-बात बराबर 25 जून, 2003 | विज्ञान नींद पूरी न हो तो...28 जनवरी, 2003 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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