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कम सोने से बढ़ता है वज़न | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अच्छे स्वास्थ्य के लिए आठ घंटे की नींद की बात काफ़ी समय से कही जाती रही है. लेकिन ताज़ा शोध से पता चला है कि अच्छी नींद न केवल आपको तरोताज़ा रखती है बल्कि इसका असर वज़न पर भी पड़ता है. अमरीका के ओहियो की केस वेस्टर्न रिजर्व विश्वविद्यालय ने लगभग 70 हज़ार महिलाओं पर 16 साल तक परीक्षण किए. उन्होंने पाया कि जो महिलाएँ रात में पाँच घंटे या उससे कम सोती हैं, उनका वज़न सात घंटे सोनेवाली महिलाओं की तुलना में 15 किलो तक बढ़ने की संभावना रहती है. यह भी पाया गया कि नींद का वज़न पर दूरगामी प्रभाव होता है. इससे पता चला कि पूरी नींद कोई विलास की चीज़ नही है बल्कि स्वस्थ जीवनशैली की एक ज़रूरत है. शोधकर्ताओं ने पाया कि उनके निष्कर्ष का कम सोने और ज्यादा खानेवाले और कम कसरत करनेवाली महिलाओं से कोई संबंध नहीं है. इस शोध में प्रमुख भूमिका निभानेवाले डॉक्टर संजय पटेल का कहना है, '' कम सोने से बढ़नेवाला यह औसत वज़न है. लेकिन कुछेक महिलाओं में तो यह इससे कहीं अधिक बढ़ता है.'' उनका कहना है कि वज़न में थोड़ी सी भी वृद्धि डायबिटीज़ और रक्त चाप जैसी समस्याएँ पैदा कर सकती है. डॉक्टर पटेल का कहना है कि दरअसल कम सोने से कम कैलोरी इस्तेमाल होती हैं. उनका कहना था कि इससे साफ़ है कि जैसा जीवन हम जीते हैं, उसका वैसा ही असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है. अमरीकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ने 2004 में ऐसा ही निष्कर्ष निकाला था. |
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