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मंगलवार, 06 जुलाई, 2004 को 00:25 GMT तक के समाचार
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तनाव सेहत के लिए अच्छा हो सकता है!
तनाव सेहत के लिए अच्छा हो सकता है
लंबे समय तक तनाव ख़तरनाक़ भी हो सकता है
आमतौर पर यही देखा गया है कि आदमी जब तनाव में होता है तो उसे ग़ुस्सा आता है और बात-बात पर झुँझलाहट होती है.

लेकिन अब कुछ शोधों से पता चला है कि कुछ हद तक तनाव भी आदमी की सेहत के लिए अच्छा हो सकता है.

तनाव के छोटे-छोटे दौर से तो शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता मज़बूत हो सकती है, मसलन कोई भाषण देने के बाद जो तनाव महसूस होता है.

अभी तक तो वैज्ञानिकों का यही कहना था कि तनाव से शरीर और सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं.

लेकिन अमरीका और कनाडा के वैज्ञानिकों डॉक्टर सुज़ान सेगरस्ट्रॉम और डॉक्टर ग्रेगरी मिलर की जोड़ी ने अपने इस शोध के नतीजे साइकोलॉजिकल बुलेटिन नाम की पत्रिका में प्रकाशित किए हैं.

'अच्छा' तनाव

केंचुकी विश्वविद्यालय और ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के इन वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ तरह का मनोवैज्ञानिक तनाव शरीर के लिए अच्छा हो सकता है.

तनाव, अच्छा या बुरा?
कम समय का दबाव तो अच्छा हो सकता है लेकिन...

इन शोधकर्ताओं ने क़रीब 300 ऐसे वैज्ञानिक शोध पत्रों का अध्ययन किया जिनमें तनाव पर अध्ययन किया गया और 19000 लोगों को अध्ययन का केंद्र बनाया गया.

शोध के मुताबिक़ जो तनाव कुछ ही देर के लिए होता है तो उस दौरान शरीर में 'लड़ो या भागो' की प्रतिक्रिया होती है और शरीर की रक्षा करने की प्राकृतिक क्षमता जागृत हो जाती है जो ख़रोंच पड़ने या छोटे से ज़ख़्म से होने वाले संक्रमणों से शरीर का बचाव करने में सक्षम होती है.

लेकिन मनोवैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि लंबे समय तक रहने वाली चिंता और तनाव इसके उलट प्रभाव भी दिखा सकते हैं.

मसलन, बुद्धि शिथिलता के बीमार किसी व्यक्ति की देखभाल करने से आदमी की रोग प्रतिरोधी क्षमता कमज़ोर हो सकती है जिसका नतीजा ये हो सकता है कि वह संक्रमणों का शिकार हो जाए.

बेहतरीन परिणाम
 हम सब अपने जीवन में कुछ दबाव और तनाव चाहते हैं. दबाव की वजह से ही लोग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करते हैं.
फ़िलिप हडसन

इस तरह की अन्य घटनाएँ ये हो सकती हैं - साथी या जीवन-साथी का साथ छूट जाना या बचपन में दुर्व्यवहार का शिकार होना.

उमरदराज़ लोग इस तरह के तनाव का ज़्यादा शिकार हो सकते हैं.

परामर्श और मनोचिकित्सा की ब्रितानी एसोसिएशन के एक सदस्य फ़िलिप हॉडसन कहते हैं कि हम सब अपने जीवन में कुछ दबाव और तनाव चाहते हैं.

दबाव की वजह से ही लोग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करते हैं.

चाहे वो किसी चीते से अपनी जान बचाने का मामला हो या फिर किसी बहुत मुश्किल इंटरव्यू का सामना करना हो, ऐसे हालात और दबाव में बेहतरीन नतीजे निकलकर सामने आते हैं.

फ़िलिप कहते हैं कि यह स्वभाविक ही है कि तनाव और दबाव में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज़्यादा सक्रिय हो जाती है.

लेकिन उनका कहना है कि सबसे ज़्यादा घातक वह स्थिति होती है जब कोई व्यक्ति तनाव और दबाव से मुक्ति पाने की कोशिश नहीं करता, इससे सेहत को बहुत नुक़सान होता है.

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