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चाय में चीनी या नमक, भला क्यों?
आपने कभी सोचा है कि कभी-कभी आप चाय में चीनी की जगह नमक क्यों डाल देते हैं या पुकारना किसी को चाहते हैं और आपकी ज़ुबान पर नाम किसी और का आता है. कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है कि नाश्ते के दौरान कॉर्नफ़्लेक्स में दूध के बजाय कॉफ़ी डल जाती है या वाशिंग मशीन में कपड़ों के साथ-साथ बिल्ली को भी डाल दिया जाता है. अब कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा एक ख़ास वजह से होता है और उन्होंने इस वजह का पता लगाने की भी कोशिश की है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा किसी के दिमाग़ में उठने वाली कुछ ख़ास तरंगों में बदलाव की वजह से होता है. साथ ही शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह बदलाव ख़तरनाक़ हद तक गंभीर भी हो सकता है. वैज्ञानिक कहते हैं कि कुछ दुर्घटनाएं होने के पीछे भी कुछ ऐसी ही वजह होती है. इन शोधकर्ताओं ने फ़िज़ियोलोजिकल सोसायटी कान्फ्रेंस में अपने ये नतीजे पेश किए हैं.
ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता दल ने लोगों के दिमाग़ की उन तरंगों का विशेष अध्ययन किया जो ग़लतियाँ करते वक़्त उठती हैं. इस शोध में हिस्सा लेने वालों को दस मिनट का एक ऐसा परीक्षण दिया गया जिसमें लंबे समय तक गहन ध्यान केंद्रित करने की ज़रूरत होती थी. उन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर एक सेकंड में सिर्फ़ एक बार कोई नंबर दिखाया जाता था. नंबर प्रकट होने पर उन्हें हर बार माउस का बटन दबाना होता था लेकिन अगर उन्हें नंबर 3 दिखाई दे तो उन्हें बटन नहीं दबाने के लिए कहा गया. तरंगों का खेल परीक्षण में भाग लेने वालों के दिमाग़ की तरंगों का अध्ययन करने पर पाया गया कि उनसे ग़लतियाँ होने की बहुत संभावनाएं थीं क्योंकि उनके दिमाग़ की एक ख़ास तरंग पी300 में काफ़ी गिरावट देखी गई. इस परीक्षण की अगुवाई करने वाली डॉक्टर अविजीत दत्ता का कहना था, "ऐसी ग़लतियाँ ख़ासतौर से उस वक़्त होती हैं जब आप थके हुए होते हैं या आप पर नींद हावी होती है, जैसे कि चाय में चीनी की जगह नमक डाल देना.
"दिमाग़ की पहले ली गई तस्वीरों से पता चलता है कि ऐसी ग़लतियाँ होते समय दिमाग़ का कौन सा हिस्सा सक्रिय होता है लेकिन हम जानना चाहते हैं कि दिमाग़ की तरंगों में किस तरह से बदलाव होता है." डॉक्टर अविजीत दत्ता का कहना था, "हमने ख़ासतौर पर पी300 तरंगों पर ध्यान दिया और पाया कि जैसे ही उनके स्तर में गिरावट आई तभी कोई ग़लती होने वाली है." वह कहती हैं कि ऐसा दिमाग़ में कोई गतिविधि शुरू होने के एक सेकंड के तीसरे हिस्से में होता है. मिसाल के तौर पर अगर आप कार चला रहे हों और कोई बच्चा अचानक आपकी कार के सामने आ जाए तो इस गतिविधि के सेकंड के तीसरे हिस्से में पी300 तरंगें सक्रिय हो जाती हैं. "आपकी प्रतिक्रिया जितनी तीव्र होगी उतनी ही तेज़ी से आपका पैर ब्रेक को दबाएगा लेकिन अगर आपकी प्रतिक्रिया ढीली-ढाली होगी तो ब्रेक पर आपका दबाव भी उतना ही ढीला होगा." डॉक्टर दत्ता के अनुसार पूर्व अध्ययनों से यह पता चलता है कि ऐसा अक्सर नींद गड़बड़ाने और शरीर की आंतरिक व्यवस्था में बदलाव की वजह से होता है. इस अध्ययन के बाद अब शोधकर्ता ऐसे मरीज़ों पर ध्यान दे रहे हैं जिन्हें नींद नहीं आने की शिकायत होती है और ऐसे बच्चे जिनका पढ़ाई में ध्यान नहीं लग पाता और उनका परीक्षा परिणाम ख़राब रहता है. |
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