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कैंसर का ख़तरा घटाती हैं गर्भनिरोधक गोलियाँ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की गर्भनिरोधक गोलियाँ कई तरह के कैंसर के ख़तरे को कम करती हैं. लेकिन शोध के रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि जिन महिलाओं ने गर्भनिरोधक गोलियों का लगातार आठ साल से ज़्यादा समय तक इस्तेमाल किया है उन्हें सर्वाइकल कैंसर होने का ख़तरा बढ़ जाता है. एबरडीन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 36 साल के आँकड़ों का विश्लेषण करते हुए एक रिपोर्ट ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित की है. इस शोध की शुरुआत 1968 में हुई थी और जनरल प्रैक्टिशनर हर छह महीने में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जानकारियाँ उपलब्ध करवा रहे थे. यह सुनिश्चित किया गया था कि यदि कोई महिला यदि अपना डॉक्टर बदल लेती है तो भी उसके स्वास्थ्य संबंधी आँकड़े बराबर मिलते रहें. शोध से पता चला है कि जो महिलाएँ गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग करती हैं, उन्हें कैंसर का ख़तरा 12 प्रतिशत तक कम हो जाता है. सबूत मिले हैं कि एक बार गर्भनिरोधक लेना बंद करने के 15 बरस बाद तक कैंसर से बचाव होता रहता है और वह ऐसे समय में महिलाओं की रक्षा करता है जब उन्हें कैंसर होने का सबसे अधिक ख़तरा होता है. लंबा उपयोग इस शोध के तहत एक अध्ययन यह भी किया गया कि लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग करने वाली महिलाओं पर इसका असर कैसा होता है. इस अध्यययन में गर्भनिरोधक लेने वाली महिलाओं में से कोई एक चौथाई महिलाओं ने हिस्सा लिया. शोध के परिणाम बताते हैं कि जो महिलाएँ आठ या ज़्यादा साल तक गर्भनिरोधक गोलियाँ लेती रही हैं उन्हें सर्वाइकल या मुख्य श्वसन प्रणाली में कैंसर होने का ख़तरा बढ़ जाता है. लेकिन कुछ महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर होने का ख़तरा कम भी होता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध के परिणाम से उन महिलाओं को आश्वस्त किया जा सकेगा जो गर्भनिरोधकों की पहली पीढ़ी की दवाओँ का सेवन करती रही हैं. शोधकर्ता मानते हैं कि गर्भनिरोधक की नई दवाएँ और उनको लेने के अलग-अलग तरीक़ो से उन महिलाओं के लिए कैंसर का ख़तरा बढ़ता है जो काफ़ी कम उम्र से ये दवाएँ ले रही हैं और लंबे समय तक इसी पर निर्भर करती हैं. लेकिन उनका कहना है कि इस समय बाज़ार में उपलब्ध दवाएँ भी कैंसर का ख़तरा कम करती हैं. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि गर्भनिरोधक गोलियाँ का उपयोग कैंसर का ख़तरा कम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. प्रोफ़ेसर फ़िलिप हैनफ़ोर्ड ने कहा, "मैं इस बात की सिफ़ारिश नहीं करूंगा कि कोई महिला कैंसर का ख़तरा कम करने के लिए गर्भनिरोधक गोलियाँ लेने लगे. यदि वह ऐसा करती है तो वह अपने आपको ख़तरे में ही डालेगी." उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में तीस लाख महिलाएँ गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग करती हैं जबकि दुनिया भर में कोई दस करोड़ महिलाएँ इसका प्रयोग करती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें रंगीन फल खाने का फल मीठा22 अगस्त, 2007 | विज्ञान त्रिफला से हो सकेगा कैंसर का इलाज18 अप्रैल, 2007 | विज्ञान चर्बी से कैंसररोधी विटामिन बेअसर10 अप्रैल, 2007 | विज्ञान कैंसर उपचार कोशिकाओं के लिए घातक30 नवंबर, 2006 | विज्ञान अब आएगी मर्दों के लिए गोली30 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान स्तन कैंसर की जाँच की नई विधि20 अगस्त, 2006 | विज्ञान 'मोबाइल फ़ोन से कैंसर का ख़तरा नहीं'30 अगस्त, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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