BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 03 अगस्त, 2007 को 16:06 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
शनि के वलय की गुत्थी सुलझी
शनि का जी-रिंग
कसीनी ने शनि के जी-रिंग की तस्वीरें भेजी हैं
वैज्ञानिकों ने सौरमंडल के ग्रह शनि के चारों ओर बनने वाले वलयों की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये छल्ले धूलकणों से बनते हैं.

ख़ासतौर पर शनि के एक वलय (छल्ले) जी-रिंग ने विशेषज्ञों को चकित कर दिया था.

वैज्ञानिकों का कहना है कि जी-रिंग के आसपास उपग्रह नहीं होने के कारण इसके धूलकण एक निश्चित स्थान पर नहीं रह पाते.

'साइंस' पत्रिका में प्रकाशित शोध में वलय का एक अलग रूप भी छापा गया है.

जी-रिंग शनि के सबसे बाहरी वलयों में से एक है. यह शनि के केंद्र से 16,8000 किलोमीटर से अधिक दूर है, जबकि सबसे नज़दीकी उपग्रह से इसकी दूरी 15,000 किलोमीटर से ज़्यादा है.

कोरनेल यूनिवर्सिटी के शोध सहायक और अध्ययन दल के प्रमुख मैथ्यू हैडमैन ने कहा, "यह धूल का वलय है. ई-रिंग और एफ-रिंग की तरह. इसके थोड़े से हिस्से में बर्फ़ के कण भी हैं."

शनि के चारों ओर छितरे ये धूलकण आसानी से हट जाते हैं.

प्रभाव

इन वलयों को अपने स्थान पर बनाए रखने के लिए इन्हें या तो नए धूल और बर्फ़ कणों की नियमित आपूर्ति ज़रूरी है या फिर चंद्रमा जैसे उपग्रह के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से ही ये अपने स्थान पर रह सकते हैं.

 यह धूल का वलय है. ई-रिंग और एफ-रिंग की तरह. इसके थोड़े से हिस्से में बर्फ़ के कण भी हैं
मैथ्यू हैडमैन, अध्ययन दल के प्रमुख

शनि का उपग्रह एनसिलाडस अपने निकटवर्ती वलय को सीधे तौर पर नए धूलकणों की आपूर्ति करता है, जबकि प्रोमेथियस और पंडोरा उपग्रह एफ-रिंग के कणों को एक निश्चित क्षेत्र में बाँधे रखने में सहायक होते हैं.

डॉ हैडमैन ने कहा, "लेकिन जी-रिंग उपग्रह के निकट नहीं है और यही वजह है कि इसका वलय दूसरे वलयों से अलग है."

संयुक्त मिशन

दरअसल, अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी इसा, और इटैलियन स्पेस एजेंसी के संयुक्त मिशन के तहत भेजे गए अंतरिक्ष यान कसिनी-होयगन्स से प्राप्त आँकड़ों से वैज्ञानिकों को जी-रिंग के बारे में विस्तृत अध्ययन करने में मदद मिली.

कसीनी से खींची गई तस्वीरों से पता चला कि जी-रिंग की संरचना दूसरे वलयों से अलग है.

वर्ष 2004 में कसीनी-होयगन्स नामक अंतरिक्ष यान पहली बार शनि ग्रह के वलय से होकर गुजरा था.

सात साल तक 12 किलोमीटर प्रति सेकेंड की तेज़ रफ़्तार से चल कर कसिनी शनि के पास पहुँचा था.

होयगन्स नामक लैंडर को शनि के सबसे बड़े चाँद टाइटन पर जनवरी 2005 में उतारा गया था.

इससे जुड़ी ख़बरें
वरुण के पास पाँच और चंद्रमा
19 अगस्त, 2004 | विज्ञान
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>