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शनि के चाँद पर मिथेन की बारिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शनि के चाँद टाइटन की सतह पर नदियों, झीलों और तालाबों में तरल मिथेन भरा हुआ है. होयगन्स यान ने टाइटन की जो तस्वीरें भेजी हैं उससे यह निष्कर्ष निकाला गया है. वैज्ञानिकों को होयगन्स से वो आँकड़े भी मिल गए हैं जिनके बारे में कहा जा रहा था कि संचार में दिक्कतों के कारण वो गुम हो गई हैं. अंतरिक्ष यान होयगन्स 14 जनवरी को टाइटन की सतह पर पहुँचा था और उसने चौंकाने वाली तस्वीरें भेजी थीं. पेरिस में शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में ये निष्कर्ष जारी किए गए. इस बारे में जानकारी दी इस योजना से जुड़े मैरटी टोमास्को ने. उन्होंने कहा, " हमारे पास इस बात के प्रमाण हैं कि टाइटन की सतह पर कई ऐसी प्रक्रियाएँ चल रही है जो पृथ्वी जैसी हैं. " तरल द्रव का बहाव वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि टाइटन की सतह पर तरल मिथेन बहता हुआ पाया गया है. टोमास्को ने कहा, " जहाँ यान उतरा उसके आस पास तरल मिथेन था जिसके बारे में कहा जा सकता है कि कुछ ही दिन पहले यहां मिथेन की बारिश हुई होगी. " टाइटन की सतह की जांच कर रहे प्रोफेसर जॉन ज़रनेकी ने कहा कि उनके उपकरणों से पता चलता है कि मिथेन वाष्प बन कर उड़ भी रहा है. संभावना है कि यही मिथेन बादल बने और फिर यदा कदा मिथेन की वर्षा होती हो. होयगन्स ने टाइटन के वायुमंडल से उतरते हुए कोई 300 तस्वीरें भेजी थीं इनमें से एक को छोड़कर बाकी तस्वीरें सतह से 16 किलोमीटर और आठ किलोमीटर ऊपर से खींची गई हैं जब शुक्रवार को होयगन्स यान एक पैराशूट के सहारे नीचे उतर रहा था. धरती से इतनी दूर पहली बार कोई यान किसी सतह पर उतरा है. होयगन्स को लेकर कसिनी यान सात साल पहले धरती से चला था. इतने दिनों में यान ने एक अरब किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी तय की. |
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