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प्लूटो ग्रह परिवार का सदस्य नहीं रहा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में लंबी बहस के बाद खगोलशास्त्रियों ने प्लूटो को ग्रह परिवार से निकाल बाहर करने की हरी झंडी दे दी है. अंतरराष्ट्रीय खगोलशास्त्री संघ या आईएयू की आमसभा में 2500 विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं. इन विशेषज्ञों के बीच कराए गए मतदान में अधिकांश ने प्लूटो को ग्रह मानने से इंकार कर दिया. साथ ही उस फॉर्मूले को भी तिलांजली दे दी गई जिसमें प्लूटो को सौरमंडल के मौजूदा नौ ग्रहों में शामिल रखते हुए तीन नए सदस्यों को अपनाने का प्रस्ताव आया था. वर्ष 1930 में अमरीकी खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबॉग ने सौरमंडल के सभी ग्रहों में सबसे दूर स्थित प्लूटो की खोज की थी. तभी से इसे ग्रह माना जा रहा था. अब इसके ग्रह नहीं रहने की सूरत में दुनिया भर के शैक्षिक संस्थानों में भौतिकी की क़िताब में संशोधन करना पड़ेगा क्योंकि अब तक बच्चों को ग्रहों के नौ नाम बताए जाते रहे हैं. आईएयू के प्रस्ताव के मुताबिक अब सिर्फ़ आठ ग्रह बच गए हैं, बुध, शुक्र, पृथ्वी, वृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून. दुखद आईएयू की ग्रहों पर गठित विशेषज्ञ समिति की अगुआई कर रहे वैज्ञानिक इवान विलियम्स ने कहा, "मेरी आँखों में आज आँसू छलक पड़े हैं. हाँ, पर हमें तो सौरमंडल की वास्तविकता बतानी होगी न कि हम जैसा चाहते हैं वो बताएँ." इससे पहले ग्रहों की संख्या बढ़ा कर 12 करने और तीन झुद्रग्रहों सेरेस, चैरन और 2003 यूबी 313 को इनमें शामिल करने के प्रस्ताव का जम कर विरोध हुआ. कैंब्रिज के 'इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनामी' से संबद्ध रॉबिन कैचपॉल का कहना था, "मेरी अपनी राय तो ये थी कि पुरानी व्यवस्था को यथावत रखा जाए. लेकिन नए ग्रहों को शामिल करने का मतलब था और भ्रम की स्थिति कायम करना." प्लूटो की स्थिति को लेकर चल रहा विवाद दशकों पुराना है और इसकी शुरुआत तब हुई जब यह पता चला कि प्लूटो सौर मंडल के बाकी आठ ग्रहों की तुलना में काफ़ी छोटा है. कई खगोलविद प्लूटो को ग्रह मानने से इनकार करते हैं और उनका मानना है कि यह 'कुइपर बेल्ड' के पिंडों में से एक हो सकता है. इस बात को और तूल दिया कैलिफ़ोर्निया के खगोलशास्त्रियों ने जिनकी खोज ने सौरमंडल में प्लूटो को ग्रह के रूप में रखे जाने पर सवाल उठा दिए. तीन वर्ष पहले हुए इस शोध में पहली बार इस बात को सामने लाया गया कि सौरमंडल में सूर्य की परिक्रमा करने वाले कुछ खगोलीय पिंडों का आकार प्लूटो से बड़ा है. | इससे जुड़ी ख़बरें ग्रहों की संख्या 12 करने की योजना16 अगस्त, 2006 | विज्ञान प्लूटो के 'ग्रह' होने पर सवाल14 अगस्त, 2006 | विज्ञान प्लूटो के लिए पहली बार यान रवाना19 जनवरी, 2006 | विज्ञान प्लूटो अभियान एक बार फिर स्थगित18 जनवरी, 2006 | विज्ञान प्लूटो अभियान पर ख़राब मौसम की मार17 जनवरी, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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