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'क्लोन जानवरों के माँस और दूध सुरक्षित' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी खाद्य नियामक एजेंसी ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि क्लोनिंग से तैयार किए गए जानवरों के दूध और माँस मनुष्य के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं. द फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफडीए ने लिखित फ़ैसले में कहा है कि क्लोनिंग से तैयार बछड़े, सूअर और बकरी से मिलने वाले खाद्य पदार्थ भी उतने ही सुरक्षित हैं जितने हमारे आम भोजन. एफडीए ने यह सलाह पाँच वर्षों के अध्ययन के बाद दी है और इसे क्लोनिंग से तैयार किए गए जानवरों के उत्पाद को अमरीकी सुपर मार्केटों में बेचने की अनुमति देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि इस संबंध में अंतिम फ़ैसला लिए जाने से पहले बड़े पैमाने पर लोगों से विचार-विमर्श किया जाएगा. उधर इस नीति के विरोधियों का कहना है कि ज्यादातर अमरीकी जानवरों की क्लोनिंग के ख़िलाफ हैं. एफडीए ने अपने अध्ययन में बछड़े, सूअर और बकरी के माँस और दुग्ध उत्पादों को शामिल किया था लेकिन भेड़ को इसमें शामिल नहीं किया गया. अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि क्लोनिंग से तैयार जानवरों के उत्पादों और पारंपरिक उत्पादों में अंतर करना तक मुश्किल है. एफडीए का कहना है कि इसका यह अर्थ निकाला जाना चाहिए कि वह उत्पादों पर अलग-अलग लेबल लगाने की सिफारिश नहीं करेगी. एफडीए के एक अधिकारी ने कहा, '' लेबलिंग पर तब तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया जाएगा जब तक कि लोगों से विचार-विमर्श करने के लिए दी गई मोहलत खत्म न हो जाए.'' 'बुरा फ़ैसला' दरअसल, क्लोनिंग में जीव का हूबहू प्रतिरूप तैयार किया जाता है. वैज्ञानिक एक डिम्ब कोशिका से डीएनए निकालते हैं और इसके बाद यह सामान्य भ्रूण की तरह विकसित होने लगता है. वर्ष 1996 में पहली बार भेड़ की क्लोनिंग की गई थी और डॉली अस्तित्व में आई थी. अगर यह फ़ैसला अंतिम रूप से लागू हो जाता है तो अमरीका क्लोनिंग के जरिए तैयार जानवरों को उत्पाद को अनुमति देने वाला पहला देश हो जाएगा. जबकि इस तर्क के विरोधी उपभोक्ता समूह एफडीए के दिशा-निर्देश को लेकर उत्साहित नहीं है. कंज़्यूमर फेडरेशन ऑफ अमरीका की कैरोल फोरमैन ने एफडीए के आदेश को '' काफ़ी ख़राब फ़ैसला'' करार दिया है. कैरोल कहती हैं, '' हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे एफडीए, कांग्रेस के सद्स्यों को लिखे कि नियामक एजेंसी अपने फ़ैसले को वापस ले.'' | इससे जुड़ी ख़बरें 'कोरियाई मानव भ्रूण क्लोनिंग नकली थी'23 दिसंबर, 2005 | विज्ञान मानव भ्रूण की क्लोनिंग को अनुमति09 फ़रवरी, 2005 | विज्ञान ऑर्डर पर तैयार किया गया बिलौटा24 दिसंबर, 2004 | विज्ञान क्लोन भ्रूण को प्रतिरोपित करने का दावा17 जनवरी, 2004 | विज्ञान तीस मानव भ्रूणों के क्लोन12 फ़रवरी, 2004 | विज्ञान अब टेढ़े नहीं होंगे शीशम के पेड़24 नवंबर, 2003 | विज्ञान अब चूहे का क्लोन26 सितंबर, 2003 | विज्ञान और अब घोड़े का क्लोन 07 अगस्त, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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