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जब रोबोट माँगेंगे अपना क़ानूनी अधिकार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटिश सरकार की ओर से कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक भविष्य में रोबोट भी आम इंसानों की तरह ही अपने नागरिक अधिकारों की माँग कर सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार अगर देश रोबोटों के इन अधिकारों की बात मान लेते हैं तो उन्हें रोबोटों को कई सामाजिक लाभ देने होंगे जिनमें उनके लिए आवासीय व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य के प्रबंध जैसी सुविधाएँ देनी पड़ सकती हैं. ब्रिटेन के विज्ञान विभाग और इनोवेशन हॉरिज़ोन स्कैनिंग सेंटर की ओर कराए गए अध्ययन की रिपोर्ट को अगले 50 वर्षों में होने वाली प्रगति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. अध्ययन रिपोर्ट में अंतरिक्ष यानों के भविष्य और मानव की उम्र को कृत्रिम रूप से बढ़ाने का भी उल्लेख है. 246 पन्नों की इस रिपोर्ट को फ़्यूचर रिसर्चर्स, आउटसाइट्स-इपसोस मोरी और अमरीका के इंस्टीट्यूट फॉर द फ्यूचर ने तैयार किया है. ब्रिटिश सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार सर डेविड किंग का कहना है, "हम भविष्यवाणी नहीं कर रहे हैं लेकिन भविष्य में क्या संभव है इस पर सोच-विचार ज़रूरी है ताकि सरकार लंबे समय के लिए रणनीति और योजना तैयार कर सके.'' इसमें विज्ञान, चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्र में उभर रही नई प्रवृत्तियों और संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार की गई है. इसमें भारत के आर्थिक विकास, नैनो तकनीक के क्षेत्र में हो रही प्रगति और एचआईवी और एड्स के ख़तरे तक की बात की गई है. शोध पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि मनुष्य का वर्तमान सोच किस तरह उसके भविष्य को प्रभावित करेगा. रिपोर्ट के जिस हिस्से में रोबोट के अधिकारों की बात की गई है उसे 'मशीनों का विकास' नाम दिया गया है. इसमें यह जानने की कोशिश की गई है कि कृत्रिम बौद्धिकता का क़ानून और राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है. वोट डालेंगे शोध पत्र के अनुसार अगर रोबोट को उस स्तर तक विकसित किया जा सके जब वे पुनर्उत्पादन, ख़ुद को और अपनी कृत्रिम बुद्धि को विकसित कर सकें तो ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. सर डेविड कहते हैं, "रिपोर्ट सरकार को भविष्य के ख़तरों और अवसरों से रू-ब-रू कराती है." रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले 20 से 50 वर्षों में रोबोटों को कुछ अधिकार दिए जा सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो रिपोर्ट के अनुसार रोबोट को भी वोट डालने, कर अदा करने और अनिवार्य सैन्य सेवा में अपना योगदान देने जैसी ज़िम्मेदारियों को भी निभाना पड़ सकता है. जबकि, समाज को अपने इन डिजिटल नागरिकों के देखभाल की ज़िम्मेदारी निभानी पड़ेगी. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि रोबोट की संख्या बढ़ने से संसाधनों और पर्यावरण पर दबाव बढ़ सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें दुनिया की 'पहली' रोबो-मछली06 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान 'वाकामारू' ज़रा एक गिलास पानी देना!30 अगस्त, 2005 | विज्ञान वर्ष 2004 की सबसे बड़ी वैज्ञानिक खोज17 दिसंबर, 2004 | विज्ञान रोबोट बनने जा रहा है घर का स्थाई सदस्य!24 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान रोबोट करेगा लोगों से बातचीत04 मार्च, 2004 | विज्ञान मंगल पर उतरा रोबोट यान 'स्पिरिट'04 जनवरी, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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