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दुनिया की 'पहली' रोबो-मछली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की सबसे पहली रोबोट मछली अब लंदन के मछलीघर में देखी जा सकती है. यह रोबोट मछली ख़ुद पानी में तैर सकती है और तैरते हुए इसके रास्ते में आने वाली चीज़ों से बच भी सकती है. इस साइबर मछली को तैयार करने में तीन साल लगे हैं और इसे ब्रिटेन की एसेक्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. इस मछली की भविष्य की पीढ़ियों को समुद्र में किए जाने वाली खोजबीन, तेल पाइपलाइनों में रिसाव और यहाँ तक कि जासूसी के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. हालाँकि रोबोट मछली पर पिछले दस साल से काम चल रहा है लेकिन एसेक्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने मॉडल को सबसे स्मार्ट बताया है. ऊर्जा एसेक्स यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर होशेंग हू ने बीबीसी को बताया, "हमने इस मछली में संवेदी उपकरण लगाए हैं, रोबोट मछली के पहले के मॉडल रिमोट कंट्रोल से चलते थे लेकिन हमारे मॉडल में संवेदी उपकरणों की बदौलत ये अपनी कृत्रिम बुद्धि का इस्तेमाल करती है."
इस मछली के हाव-भाव और गतिविधियाँ ज़्यादा वास्तविक नज़र आती हैं. इस मछली की लंबाई क़रीब 50 सेंटीमीटर है और ऊँचाई 15 सेंटीमीटर और यह 12 सेंटीमीटर चौड़ी है. यह 20 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से दौड़ सकती है लेकिन इसकी रफ़्तार आधी रखी गई है क्योंकि ताकि बैटरी ज़्यादा देर तक चल सके और इसकी बैटरी पाँच घंटे तक चल सकती है. भविष्य में इस मछली की कृत्रिम बुद्धि को बढ़ाने के लिए एक मशीन तैयार करने की योजना है जो ज़रूरत पड़ने पर इसे फिर से चार्ज कर सकेगी. प्रोफ़ेसर होशेंग हू ने कहा, "हम चाहते हैं कि यह मछली ख़ुद अपने चार्जिंग स्टेशन को तलाश करे, जैसे कि कोई असली मछली अपने खाने की तलाश करती है." ऐसी आशा की जा रही है कि आम लोगों को इस तरह के रोबोट उपकरणों के संपर्क में लाने से विज्ञान और तकनीक के बार में उनका ज्ञान और आसानी से बढ़ेगा. फिलहाल तीन रोबोट मछलियों को लंदन के मछलीघर में असली मछलियों के साथ रखा जाएगा और उनके नामकरण के लिए बच्चों की एक प्रतियोगिता के ज़रिए नाम छाँटे जाएंगे. |
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