| रोबोट दौड़ाएंगे ऊंट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि अगले सत्र से ऊंटों की दौड़ में रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा यानी ऊंटों पर सवार होंगे बच्चों की जगह रोबोट. इस तरह की ऊंट रेसों में पहले छोटे छोटे बच्चों का इस्तेमाल किया जाता था जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना होती रही है. ऊंटों की ये दौड़ लंबी और खतरनाक भी होती है जिसमें कई बार बच्चे गिर जाते हैं और उनकी मौत भी हो जाती थी. अधिकारियों का कहना है कि शनिवार को ऊंट पर सवार किए जाने वाले एक रोबोट का सफल परीक्षण किया गया है और अब आगे से ऐसे ही रोबोटों का इस्तेमाल किया जाएगा. राहत संस्थाओं का कहना है कि खाड़ी देशों में ऊंटों की दौड़ में 40 हज़ार से अधिक बच्चों का इस्तेमाल किया जाता रहा है और इसमें से कई बच्चों को अवैध तरीके से बांग्लादेश और भारत जैसे देशों से लाया जाता है. बीबीसी से संयुक्त अरब अमीरात संवाददाता जूलिया व्हीलर का कहना है कि ऊंटों के सवार के रुप में बच्चों के इस्तेमाल का मुद्दा देश के लिए शर्मिन्दगी का विषय रहा है. यूएई में ऊंटों की दौड़ पारंपरिक खेलों का हिस्सा है और क्षेत्र की विरासत का भी हिस्सा रहा है. पिछले कुछ महीनों में इन खेलों से बच्चों को अलग करने के लिए कई कानून पारित किए गए और अब इस महीने पारित क़ानून के अनुसार इसमें 16 साल से कम के बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. अब इस दौड़ के लिए रोबोटों का इस्तेमाल होगा. दैनिक गल्फ न्यूज़ ने एक आधिकारिक बयान के हवाले से कहा " ये रोबोट बहुत हल्के हैं जो रिमोट कंट्रोल के ज़रिए आदेश सुनते हैं." इन रोबोटों के परीक्षण के दौरान देश के शाही परिवार के सदस्य भी मौजूद थे और वो इससे बहुत प्रभावित भी हुए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यूएई के इस कदम का मानवाधिकार संस्थाएं भी स्वागत कर सकती हैं क्योंकि अब बच्चों का ग़लत इस्तेमाल रुक जाएगा. |
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