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माँस मिलेगा बिना जानवर को मारे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अभी लोग पूछते हैं, माँस झटका है या हलाल, कुछ समय बाद शायद लोग पूछें प्रयोगशाला का है या जानवर का. वैज्ञानिकों ने एक नई विधि से प्रयोगशाला में माँस तैयार करने की योजना सामने रखी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जानवरों की कोशिकाओं को प्रयोगशाला में कृत्रिम तरीक़े से विकसित करके माँस तैयार किया जा सकता है. अमरीका की मेरीलैंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि टिश्यू कल्चर के ज़रिए प्रयोगशाला में बड़े पैमाने पर माँस तैयार किया जा सकता है जिससे पर्यावरण का भला होगा और भूखे लोगों को भोजन मिल सकेगा. इस प्रयोग की अगुआई कर रहे अमरीकी वैज्ञानिक जेसन माथने का कहना है, "सिद्धांत के तौर पर पूरी दुनिया के लिए माँस की सप्लाई एक कोशिका से की जा सकती है, लंबे समय में एक फ़ायदेमंद विचार है." इन वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रयोगशाला में बनाया गया माँस स्वास्थ्य के लिए बेहतर तो होगा ही, जानवरों के प्रति होने वाली क्रूरता को भी कम करने में मदद मिलेगी. मौजूदा स्थिति अब तक टिश्यू इंजीनियरिंग का इस्तेमाल सिर्फ़ मेडिकल क्षेत्र में होता रहा है, नासा के वैज्ञानिकों ने एक प्रयोगशाला में मछली की कोशिका से माँस तैयार करने में सफलता पाई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रक्रिया को उद्योग का रूप देने के लिए कोशिकाओं को ऐसी चादर पर रखना होगा जो उसे लगातार खींचती रहे ताकि बढ़ती हुई कोशिकाएँ जानवर के शरीर में जिस तरह हिलती हैं, वैसे ही हिलती रहें. माथने कहते हैं, "अगर बढ़ती हुई कोशिकाओं को लगातार नहीं हिलाया गया तो उनका स्वाद लुगदी जैसा हो जाएगा." सवाल इस तकनीक से अगर माँस का उत्पादन शुरू हुआ तो अनेक सवाल उठ खड़े होंगे, पहला तो यही कि क्या इसे शाकाहार माना जाएगा क्योंकि इसके लिए किसी जानवर को मारना नहीं होगा. ब्रितानी शाकाहारी सोसाइटी की केरी बेनेट कहती हैं, "यह वैसे लोगों को पसंद नहीं आएगा जो माँस खाने को अनैतिक समझते हैं या वैसे लोग भी जो कुछ भी अप्राकृतिक नहीं खाना चाहते." इसके अलावा, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि खान-पान का नियमन करने वाली एजेंसियों की प्रतिक्रिया इस पर क्या होगी. अमरीकी फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने आदेश दिया है कि ऐसे किसी जानवर का माँस नहीं बेचा जाना चाहिए जिसे क्लोन किया गया हो. ज़ाहिर है, अभी प्रयोगशाला में तैयार माँस के आपके प्लेट में पहुँचने में काफ़ी देर है, वह भी अगर इसे व्यावसायिक स्तर पर बेचने की अनुमति मिली तो. |
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