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हलाल गोश्त की जानकारी साइट से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में एक इंटरनेट साइट हलाल मांस बेचने वाली दुकानें खोजने में मुसलमानों की मदद कर रहा है. यह साइट न केवल हलाल गोश्त बल्कि खाने पीने के संबंध में इस्लामी कायदों के अनुसार बनने वाले भोजन की उपलब्धता भी बताता है. उल्लेखनीय है कि मुसलमान सिर्फ हलाल किया हुआ मांस ही खाते हैं जबकि दुनिया में सभी स्थानों पर इस तरह का मांस नहीं मिलता. इसी दिक्कत को दूर करने के लक्ष्य से ज़बीहा डॉट कॉम नाम की साइट खोली गई है जिससे मुस्लिमों को हलाल गोश्त बेचने वाली दुकानें, रेस्तरां और सुपरमार्केट मिल जाते हैं. वर्जिनिया के फाल्स चर्च सुपरमार्केट में खरीदारी कर रहे सईद अमानुल्लाह बताते हैं," मैं ऐसी चीजें खोज रहा हूं जिन्हें हम खा सकें. मुझे हलाल गोश्त मिल गया है. ईरानी दही से बनने वाला पेय भी मिला है और भारत की चटनी भी. " अमानुल्लाह का परिवार मूलत भारत के दक्षिणी भाग का है लेकिन अब वो अमरीका में ही बस गए हैं. अमानुल्लाह अमरीका में ही पले बढे. जब वह छोटे थे तो उनके आस पास हलाल मांस की कोई दुकान नहीं थी लेकिन धीरे धीरे अमरीका में मुसलमानों की ऐसी दुकानों की संख्या बढ़ी. अमानुल्लाह कहते हैं," पांच छह साल पहले यहां मुस्लिम आबादी काफी हो गई तो बाज़ार भी खुलने लगे जो मुसलमानों के भोजन को समझते थे. मैं इन दुकानों पर जाता था और लोगों को इस बारे में बताता भी था." वो कहते हैं," उसके बाद मैंने सोचा कि क्यों न एक साइट खोली जाए जो अमरीकी मुसलमानों को इस तरह की जानकारी उपलब्ध करा सके." प्रतिक्रिया इसी के साथ ज़िबह डॉट कॉम की शुरुआत हुई जिसमें पहले पहल हलाल गोश्त देने वाले दुकानों का नाम दिया गया. कोई भी इस साइट पर फ्री में जा सकता है और जानकारी ले सकता है. अमानुल्लाह को साइट पर कई प्रतिक्रियाएं मिलती है. कुछ अच्छी और कुछ ख़राब भी. कुछ दुकानों के मालिक इस बात से नाराज़ भी होते हैं उनकी दुकान के बारे में कुछ ख़राब क्यों लिखा गया. इन सबके बावजूद ज़िबह डॉट कॉम लोकप्रिय हो रहा है. न केवल अमरीका में बल्कि यूरोप में बी लोग इसका इस्तेमाल करने लगे है. अमानुल्लाह कहते हैं," यूरोपीय देशों में मुस्लिम आबादी इंटरनेट का काफी इस्तेमाल करती है इसलिए साइट पर काफी लोग आ जाते हैं." |
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