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मंगलवार, 03 अक्तूबर, 2006 को 12:16 GMT तक के समाचार
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एचआईवी संक्रमित जोड़ियों की शादी

एचआईवी संक्रमित पति पत्नी
मैरिज ब्यूरो की मदद से पहले भी जोड़ियाँ बन चुकी हैं
गुजरात के सूरत शहर में एचआईवी संक्रमण से ग्रस्त लोगों के लिए उनका जीवन साथी चुनने के वास्ते रविवार को एक अनूठे कार्यक्रम का आयोजन हुआ.

सामाजिक संस्था, 'गुजरात स्टेट नेटवर्क फॉर पीपुल लिविंग विद एचआईवी एड्स' के इस कार्यक्रम में पूरे गुजरात प्रदेश से 40 एचआईवी संक्रमित पुरुषों और 25 एचआईवी संक्रमित महिलाओं ने भाग लिया और खास बात ये रही कि दिन खत्म होते-होते तीन जोड़ों ने विवाह बंधन में बंधने का फ़ैसला कर लिया.

आयोजन से जुड़ी दक्षा पटेल ने बताया कि कार्यक्रम में शिरकत करने वाले सभी पुरुष 35 साल से कम उम्र के थे, जबकि महिलाएं 25 साल से कम उम्र की विधवाएँ थीं.

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मकसद एचआईवी संक्रमित लोगों को आम ज़िंदगी जीने के लिए प्रोत्साहित करना था.

उनका कहना है, “ये पुरुष उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहाँ शादी के लिए उन पर परिवारवालों और मित्रों का दबाव रहता है और उनके लिए ये बता पाना बहुत मुश्किल होता है कि वे एचआईवी संक्रमित हैं.”

 ये पुरुष उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहाँ शादी के लिए उन पर परिवारवालों और मित्रों का दबाव रहता है और उनके लिए ये बता पाना बहुत मुश्किल होता है कि वे एचआईवी संक्रमित हैं

पटेल ने कहा कि इसी तरह छोटे-छोटे बच्चों वाली विधवाओं की परेशानियों का भी अंत नहीं है. उन्हें आर्थिक और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है और इस तरह के कार्यक्रमों से किसी हद तक इन परेशानियों का हल निकल सकता है.

वो कहतीं हैं, “एक एचआईवी पॉजीटिव व्यक्ति का अपने जैसा ही जीवनसाथी चुनना बेहतर होता है. इससे एचआईवी का संक्रमण भी रुक सकता है. दूसरे अगर एचआईवी पॉजीटिव विधवाओं का दोबारा विवाह होता है तो इससे विधवा पुनर्विवाह की मुहिम को भी बल मिलेगा.”

खास बात यह है कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी एचआईवी संक्रमित लोग दसवीं पास थे और जहाँ वह काम कर रहे हैं, वहाँ लोगों को उनके एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी नहीं है.

दक्षा पटेल ने एचआईवी संक्रमित लोगों की शादियाँ कराने के लिए पिछले वर्ष एक मैरिज ब्यूरो शुरू किया था और उनका कहना है कि शुरूआती सफलता से वे काफ़ी उत्साहित हैं.

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