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उंगलियों के निशान और जीवनशैली... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपराधियों को पकड़ने के लिए उनके उंगलियों के निशानों का लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने अब उंगलियों के निशानों के एक नए पहलू पर शोध किया है. शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया है कि उंगलियों के निशानों से कैसे किसी व्यक्ति की जीवनशैली के बारे में पता लगाया जा सकता है. बीबीसी के विज्ञान संवाददाता ने बताया है कि शोधकर्ताओं ने इस ओर काम किया है कि किस तरह उम्र, धूम्रपान, मादक पदार्थों और कुछ विशेष निजी उत्पादों के सेवन से उंगलियों के निशान बदलते हैं. शोधकर्ताओं ने ये भी कहा है कि वे उंगलियों के उन निशानों के बेहतर नमूने पेश करने में मदद कर सकते हैं जो निशान कई दिनों या हफ़्तों से अनदेखे रह गए हों. शोध का मकसद उन बंदूकों और बमों के हिस्सों पर से उंगलियों के निशान ढूँढना है, जिन निशानों को ढूँढना आम तौर पर मुश्किल होता है. ये काम लंदन के किंग्स कॉलेज में डॉक्टर सू जिक्कैल्स की अगुआई में चल रहा है. रासायनिक संरचना उंगलियों के निशानों से ज़्यादा जानकारी हासिल करने के काम में इन निशानों की रासायनिक संरचना और समय के साथ उनमें आए बदलाव का सहारा लिया गया है. डॉक्टर सू जिक्कैल्स का कहना है कि जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ को छूता है, तो उसके अणु और लिपिड पीछे छूट जाते हैं. इन्हीं का अध्ययन कर शोधकर्ता पुराने पड़ चुके उंगलियों के निशानों से कई तरह के तथ्य निकालने की कोशिश कर रहे हैं. डॉक्टर सू जिक्कैल्स के मुताबिक बच्चे, बड़े और बूढ़ों के उंगलियों के निशानों में अलग अलग तरह के ऑर्गेनिक कंपाउंड यानि ऑर्गेनिक मिश्रण होते हैं. इसी तरह ध्रूमपान करने वाले लोग कोटिनाइन नाम का रयासन छोड़ते हैं. शोधकर्ताओं ने इन्हीं तथ्यों का इस्तेमाल अपने शोध में किया है. इसके अलावा वेल्स विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर नील और उनके साथी भी उंगलियों के निशानों पर शोध कर रहे हैं, ख़ासकर गोलियों पर से उंगलियों के निशान ढूँढने के काम पर. प्रोफ़ेसर नील ने कहा है कि इस शोध का नतीजा होगा एक ऐसा यंत्र जो घटनास्थल पर ही उंगलियों के निशानों का परीक्षण कर सकेगा. उंगलियों के निशान पर अब तक किया गया शोध लंदन में हुए एक आयोजन में पेश किया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें जापान में मोबाइल फ़ोन पर टीवी शुरु01 अप्रैल, 2006 | विज्ञान दुनिया ने देखा सूर्यग्रहण का नज़ारा29 मार्च, 2006 | विज्ञान ध्वनि से सात गुना तेज़ रफ़्तार25 मार्च, 2006 | विज्ञान वायुमंडल में कार्बन डाइआक्साइड बढ़ा14 मार्च, 2006 | विज्ञान बिना प्रयोगशाला के डीएनए जाँच होगी19 अक्तूबर, 2003 | विज्ञान दुनिया का 'सबसे पुराना' चावल22 अक्तूबर, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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