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दिमाग़ के ज़रिए दर्द को मापने की कोशिश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में कुछ शोधकर्ता इस पर काम कर रहे हैं कि ये कैसे मापा जाए कि आख़िर किसी मरीज़ को कितना दर्द हो रहा है. किसी भी बीमारी से पीड़ित मरीज़ को कितना दर्द हो रहा है ये जानना डॉक्टर के लिए बेहद ज़रूरी होता है. इस जानकारी के लिए डॉक्टरों को मरीज़ों के बताए ब्यौरे पर ही निर्भर करना पड़ता है. लेकिन अब लंदन में कुछ शोधकर्ता आधुनिक तकनीक के ज़रिए उन लोगों की दिमाग़ी गतिविधियाँ मापने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें किसी तरह का दर्द हो रहा है. इन गतिविधियों की मदद से शोधकर्ताओं को दर्द के पैमाने के बारे में पता चल पाएगा. शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि अगर उन्हें ये पता रहेगा कि मरीज़ कितनी तकलीफ़ में है तो डॉक्टर जान पाएँगे कि क्या वे मरीज़ को सही दवा दे रहे हैं या नहीं. दर्द के बारे में जानने के लिए शोधकर्ता शुरुआत में चुंबकी रेज़ोनेंस इमेजिंग का उपयोग करेंगे. ये तकीनीक पीठ के दर्द से परेशान लोगों और मधुमेह जैसी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए इस्तेमाल की जाएगी. ब्रिटेन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में शोध विभाग के प्रोफ़ेसर सैली डेविस कहते हैं, “ये शोध कई पहलूओँ को समझने में अहम भूमिका निभा रहा है-मरीज़ों को होने वाले दर्द को समझने में, दर्द किस वजह से होता है, शारीरिक रुप से दर्द कहाँ और कैसे महसूस होता है और मरीज़ों की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ता है.” शोध से जुड़े डॉक्टर मगदी हना का कहना है कि वे उम्मीद करते हैं कि नई तकनीक के इस्तेमाल से मरीज़ों का बेहतर इलाज हो पाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें झूठों का सफ़ेदी से ताल्लुक!30 सितंबर, 2005 | विज्ञान दर्द घटाती है, दर्द कम होने की सोच06 सितंबर, 2005 | विज्ञान 'दर्द की दवा' है ज़ैतून का तेल03 सितंबर, 2005 | विज्ञान भावनाओं से दमा बढ़ सकता है31 अगस्त, 2005 | विज्ञान बड़े मस्तिष्क का बुद्धि से कोई संबंध नहीं19 फ़रवरी, 2005 | विज्ञान भाषाओं से मस्तिष्क का विकास होता है13 अक्तूबर, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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