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शनिवार, 03 सितंबर, 2005 को 12:09 GMT तक के समाचार
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'दर्द की दवा' है ज़ैतून का तेल
जैतून
जैतून के तेल में होते हैं दर्द निवारक तत्व
ज़ैतून के तेल से सिर्फ़ खाना ही स्वादिष्ट नहीं बनता बल्कि दर्द भी दूर होता है. अमरीका में हुए एक शोध में पता चला है कि ज़ैतून का तेल दर्द निवारक भी है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि ज़ैतून के तेल में एक ऐसा प्राकृतिक रसायन पाया जाता है जो दर्द निवारक का काम करता है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि 50 ग्राम अच्छे ज़ैतून का तेल आईबूप्रोफ़ेन दवा की एक मात्रा के 10वें हिस्से के बराबर काम करता है.

विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ में छपे एक लेख के अनुसार फ़िलाडेल्फ़िया के मॉनेल केमिकल केंद्र की टीम का कहना है कि ज़ैतून के तेल में मौजूद एक रसायन सूजन दूर करने का काम करता है.

टीम का कहना है कि तेल का प्रभाव इतना नहीं होता कि उससे सर दर्द दूर हो सके लेकिन इससे भूमध्यसागरीय भोजन के प्रभाव का पता चलता है.

भूमध्यसागरीय भोजन में मुख्य रुप से ज़ैतून का तेल इस्तेमाल किया जाता है.

ज़ैतून में बड़ी मात्रा में पाए जाने वाला तत्व ‘ओलिओकॉंथाल’ ठीक उसी तरह से काम करता है जिस तरह से आईबूप्रोफ़ेन और सूजन दूर करने वाली दूसरी दवाएँ काम करती है.

माना जाता है कि सूजन का सीधा संबध हृदय और कैंसर जैसी बीमारियों के साथ होता है.

शोधपत्र के सह-लेखक पॉल ब्रेसलिन का कहना है कि “भूमध्यसागरीय भोजन में ज़ैतून के तेल की प्रधानता होने के कारण यह सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद माना जाता है और यह तेल दिल का दौरा, स्तन और फ़ेफड़ों के कैंसर, दिल की बीमारियों और पागलपन जैसी कुछ बीमारयों में लाभ पहुँचाता है”.

उनका कहना है कि “इसी तरह के फ़ायदे सूजन दूर करने वाली एस्प्रीन और आईबूप्रोफ़ेन जैसी स्टेरॉयड रहित दवाओँ से भी होते हैं”.

विशेषता

उन्होनें आगे कहा कि अब चूँकि ओलिओकॉंथाल की सूजन दूर करने वाली विशेषता का पता चल गया है तो यह स्पष्ट है कि उस भोजन में इसका लाभ मिलता है जिसमें ज़ैतून का तेल मुख्यता से इस्तेमाल किया जाता है.

 भूमध्यसागरीय भोजन में ज़ैतून के तेल की प्रधानता होने के कारण यह सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद माना जाता है और यह तेल दिल का दौरा, स्तन और फ़ेफड़ों के कैंसर, दिल की बीमारियों और पागलपन जैसी कुछ बीमारयों में लाभ पहुँचाता है
शोधकर्ता

ज़ैतून के तेल में इस विशेषता का पता एक शोधकर्ता को उस समय चला जब उन्होनें यह पाया कि अच्छे किस्म के ताज़ा जैतून के तेल से गले के पिछले हिस्से में उसी तरह से जलन होती है जैसी कि आईबूप्रोफ़ेन दवा खाने के बाद होती है.

ब्रिटिश पोषण संस्था की आहार विशेषज्ञ क्लेयर विलियम्सन का कहना है कि “ज़ैतून के तेल में जैविक रुप से क्रियाशील कई तत्व होते हैं लेकिन हम स्पष्ट तौर से नहीं बता सकते कि वो क्या काम करते है”.

उनका विश्वास है कि जैतून के तेल में कुछ एंटीआक्सीडेंट तत्व होते है लेकिन यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण होगा कि यह दवा की तरह काम करता है. इस पर अभी और अधिक शोध की ज़रुरत है.

उनका यह भी कहना था कि ज़ैतून के तेल में वसा की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण इसका इस्तेमाल सीमित तौर पर ही करना चाहिए.

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