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डायबटीज़ के मरीज़ों को राहत की उम्मीद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने एक ऐसी दवा तैयार की है जिससे डायबटीज़ के मरीज़ों को इंसुलिन के दर्दनाक इंजेक्शन से छुटकारा मिल जाएगा. इतना ही नहीं यह दवा कुछ अन्य बीमारियों में भी काम आ सकेगी. यह दवा एक टिकिया यानी गोली के रूप में तैयार की गई है और यह पेट में जाकर आँतों के ज़रिए अपना असर दिखाती है जिससे मरीज़ को इंजेक्शन लगाने जैसा दर्द नहीं होता. दरअसल सभी दवाएँ खाई नहीं जा सकतीं क्योंकि पेट में कुछ रसायनिक तत्व होते हैं जो कुछ दवाओं का असर होने से पहले ही उन्हें बेअसर कर देते हैं. इसीलिए कुछ दवाओं को इंजेक्शन के ज़रिए शरीर में पहुँचाया जाता है, इंसुलिन भी उनमें से एक है. लेकिन इंजेक्शन दर्दनाक तो होता ही है उससे संक्रमण का ख़तरा भी रहता है. भारतीय वैज्ञानिकों इस नई दवा का परीक्षण प्रयोगशाला में तो कर लिया है और मानव पर परीक्षण किया जाना है कि उसमें यह कितनी असरदार साबित होती है. इसकी जानकारी पॉलीमर इंटरनेशनल नामक पत्रिका में छपी है. इसकी ख़ासियत ये है कि यह सीधे पेट में नहीं जाकर एक बड़ी आँत में पहुँचेगी और पेट की तरह आँत में वैसे रसायनिक तत्व नहीं होते जो इंसुलिन जैसी दवा को बेअसर कर दें. इसलिए यह दवा मरीज़ के शरीर में पहुँचकर भी बेअसर साबित नहीं होगी. वैज्ञानिकों का उद्देश्य दरअसल खाने की ऐसी दवा तैयार करना है जो डायबटीज़ जैसी बीमारियों में पूरा असर दिखा सके. |
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