|
भाषाओं से मस्तिष्क का विकास होता है | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जिस तरह से शारीरिक कसरत से मांसपेशियाँ पुष्ट होती हैं, उसी तरह भाषाएँ सीखने से दिमाग़ की ताक़त बढती है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने 105 लोगों के दिमाग़ के परीक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला है. इनमें से जिन 80 लोगों की बुद्धि ज़्यादा प्रखर पाई गई उन सभी को दो भाषाएँ आती थीं. शोध में यह पाया गया कि और अधिक भाषाएँ सीखने से मस्तिष्क का ग्रे मैटर बढ़ जाता है. यही दिमाग़ का वो हिस्सा है जिससे सूचनाऐँ छनती हैं. सारी जानकारी विज्ञान पत्रिका 'नेचर' में छापी गई है. व्यापक अध्ययन इस प्रयोग में 83 ब्रितानियों के दिमाग के एक्सरे लिए गये थे जिनमें से 25 लोग केवल एक भाषा जानते थे, 25 लोगों ने पाँच साल की उम्र के पहले एक दूसरी यूरोपीय भाषा सीख ली थी, जबकि 33 लोगों ने 10 से 15 वर्ष की आयु के बीच दूसरी यूरोपीय भाषा सीखी थी. पाया ये गया कि जितनी छोटी उम्र में लोगों ने दूसरी भाषायें सीखीं उतना ही उनकी बुद्धि अधिक प्रखर पाई गई. दूसरा निष्कर्ष ये कि जितनी ज़्यादा उम्र में आप नई भाषाएँ सीखेंगें उतनी ही अधिक कठिनाई सीखने में पेश आयेगी. हाल में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार ब्रिटन में 10 में से केवल एक कामगार दूसरी विदेशी भाषा बोलता है. ब्रिटेन की सरकार फिलहाल यह तय कर रही है कि वर्ष 2010 तक सारे प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को एक से अधिक भाषाएँ सीखाना अनिवार्य हो जायेगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||