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ख़तना एड्स से बचाव करती है | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय एड्स सोसायटी के सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए एक नए अनुसंधान से पता चलता है कि एचआईवी के प्रसार को रोकने के लिए ख़तना कराया जाना उतना ही असरदार है जितनी कोई वैक्सीन. फ़्रांस की एक एजेंसी ने दक्षिण अफ़्रीका में तीन हज़ार से ज़्यादा पुरुषों पर शोध करने के बाद यह नतीजा निकाला है जिसे ब्राज़ील के शहर रियो दि जनेरो में जारी एक सम्मेलन में पेश किया गया. बीबीसी के स्वास्थ्य संवाददाता का कहना है कि एचआईवी के प्रसार को रोकने के लिए ख़तना पर यह पहला वैज्ञानिक अध्ययन है और इससे पता चलता है कि ख़तना से संक्रमण का ख़तरा काफ़ी हद तक दूर हो जाता है. समझा जाता है कि पुरुष के लिंग की आगे की त्वचा एचआईवी के संक्रमण से जल्दी प्रभावित हो सकती है जबकि अन्य हिस्से पर इतनी तेज़ी से असर नहीं होता. इसलिए ख़तना के दौरान आगे की त्वचा हटा देने से संक्रमण का ख़तरा काफ़ी हद तक दूर हो जाता है. यूएएड्स और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस अध्ययन का स्वागत किया है लेकिन यह भी कहा है कि इसके नतीजों की पुष्टि के लिए और शोध किए जाने की ज़रूरत है. इस बारे में युगांडा और कीनिया में कुछ और अध्ययन किए जा रहे हैं और वहाँ के लोगों पर इसके असर का जायज़ा लिया जा रहा है. अगर वहाँ भी इसके यही परिणाम सामने आते हैं तो एचआईवी का प्रसार रोकने के लिए कंडोम के साथ ख़तना के प्रचार पर भी ज़ोर दिया जा सकता है. |
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