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अंटार्कटिका में मोटी होती बर्फ़ की परत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक रिपोर्ट के अनुसार अंटार्कटिका में बर्फ़ की परत मोटी होती जा रही है और इस कारण आनेवाले दिनों में समुद्रों में जल स्तर बढ़ने का ख़तरा हो सकता है. वैज्ञानिकों को भय है कि अगर समुद्रों का जल स्तर बहुत अधिक बढ़ा तो निचले और तटीय क्षेत्रों में तबाही हो सकती है. विज्ञान जर्नल 'साइंस' के अनुसार अंटार्कटिका में ये स्थिति तापमान बढ़ने के कारण अतिरिक्त हिमपात होने से पैदा हुई है. वैसे वैज्ञानिकों को चिंता है कि अंटार्कटिका का कुल भार कम हो रहा है क्योंकि तटीय क्षेत्रों में बर्फ़ तेज़ी से पिघल रही है. अंटार्कटिका पर दुनिया की सबसे अधिक बर्फ़ है और इस बारे में कोई जानकारी मिलने से भविष्य में समुद्री जल के स्तर में बदलाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है. जल स्तर जलवायु परिवर्तन पर बनी अंतर्सरकारी समिति के अनुसार ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ़ पिघलने के कारण समुद्री जल स्तर अभी 1.8 मिलिमीटर प्रति वर्ष की दर से ऊपर जा रहा है. समिति का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग यानी दुनिया के बढ़ते तापमान के कारण अंटार्कटिका के ऊपर बर्फ़बारी अधिक हो सकती है क्योंकि ऐसी स्थिति में वाष्पीकरण अधिक होता है. अटलांटिक महासागर के दोनों तरफ़ के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के बाद पाया कि पूर्वी अंटार्कटिका में 1992 और 2003 के बीच अटलांटिक की मोटाई में प्रतिवर्ष 1.8 सेंटीमीटर की दर से वृद्धि हुई. ख़तरा पूर्वी अंटार्कटिका पूरे अंटार्कटिका का 75 प्रतिशत हिस्सा है और यहाँ महादेश का 85 प्रतिशत बर्फ़ है. अमरीका के मिसौरी विश्वविद्यालय के कर्ट डेविस ने बताया कि पूर्वी अटलांटिक में हिमपात सोख लिया जा रहा है जिसके कारण समुद्री जल का स्तर नहीं बढ़ा. उन्होंने कहा,"अधिकतर जगहों पर बर्फ़ के कारण समुद्री जल का स्तर बढ़ता है लेकिन ये इकलौता क्षेत्र है जहाँ बर्फ़ सोख लिया गया". लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वी अंटार्कटिका में सदा ऐसा नहीं होगा और तापमान बढ़ने के कारण भविष्य में बर्फ़ पिघल सकती है जिससे समुद्र में जल बढ़ सकता है. |
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