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तेज़ी से पिघल रही है अंटार्कटिक की बर्फ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का कहना है कि विश्व भर में तापमान के बढ़ने के कारण अंटार्कटिका में जमी हुई बर्फ उम्मीद से अधिक तेज़ी से पिघल रही है. ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों का मानना है कि धुव्रीय बर्फ के पिघलने के कारण दुनिया भर में समुद्री जल का स्तर तेज़ी से ऊपर जा रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्व में इस संबंध में जो अनुमान लगाए थे, वो सभी पीछे छूटते जा रहे हैं. इस दल ने बताया कि पिछले 50 सालों में अंटार्कटिका प्रायद्वीप की 13000 वर्ग किलोमीटर बर्फ पिघल गई है. समुद्र तल अंटार्कटिक में बर्फ के पिघलने का सबसे बड़ा प्रभाव यही होता है समुद्र जल के रुप में जमी बर्फ पिघलती है. आमतौर पर बड़े ग्लेशियरों को रोकने का काम करने वाली इस बर्फ के पिघलने से ग्लेशियर भी पिघलने लगते हैं और फिर जलस्तर बढ़ जाता है. अंटार्कटिक का एक और भाग गर्मी के बढ़ने से प्रभावित हो रहा है. पश्चिमी अंटार्कटिका में समुद्री पानी के गरम होने से समुद्र के नीचे जमी बर्फ भी पिघल रही है. बीबीसी के पर्यावरण संवाददाता रिचर्ड ब्लैक का कहना है कि अगर बर्फ का इसी तेज़ी से पिघलना जारी रहा तो इसका समुद्री जलस्तर पर बहुत बुरा असर पड़ेगा. हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि ये प्रभाव कितने घातक होंगे. |
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