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क्योटो संधि के पक्ष में 138 अमरीकी मेयर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जिन लोगों ने हॉलीवुड की फ़िल्म 'द डे आफ़्टर टुमॉरो' देखी होगी उन्हें निश्चित रूप से याद होंगे फ़िल्म के वे दृश्य जिनमें ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से पूरा न्यूयॉर्क शहर पहले तो पानी में डूब जाता है और उसके बाद शहर पर छा जाती है बर्फ़ की चादर. ग्लोबल वॉर्मिंग के संभावित भयावह नतीजों की एक काल्पनिक तस्वीर! ऐसे सभी प्रयासों का बुश प्रशासन पर भले ही असर न पड़ा हो मगर अमरीका के 138 शहरों के मेयर पिछले कुछ महीनों में इस बात पर ज़रूर सहमत हुए हैं कि वे ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन क्योटो संधि के दिशानिर्देशों के मुताबिक़ सात प्रतिशत तक कम करने की दिशा में काम करेंगे. इनमें ख़ुद राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी के भी 12 मेयर हैं. जिन शहरों के ये मेयर हैं वे लगभग तीन करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. संकल्प इस दिशा में काम शुरू किया सिएटल के मेयर ग्रेग निकल्स ने. वह बताते हैं, "16 फ़रवरी को 141 देशों में क्योटो संधि अस्तित्व में आई और उसी दिन मैंने ये घोषणा की कि सिएटल शहर, संधि के ज़रिए तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करेगा. इसके बाद मैंने अमरीका भर के अपने 400 मेयरों को पत्र भेजा जिनमें से 138 अब तक इसमें शामिल हो चुके हैं." इन मेयरों में न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को जैसे बड़े शहरों के मेयर भी शामिल हैं. इस सहमति पत्र में लक्ष्य रखा गया है कि अमरीका ऊर्जा के अक्षय स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाए और ऐसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करे जिनसे ईंधन के स्रोतों को भी बचाया जा सके. लंदन स्थित ग़ैर सरकारी संगठन क्लाइमेट ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर स्टीव हॉवर्ड मानते हैं कि इसके ज़रिए ये बुश प्रशासन को ये संकेत देने की कोशिश हो रही है कि वो जलवायु परिवर्तन को गंभीर मुद्दे के तौर पर ले. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रम के प्रमुख डॉक्टर आरके पचौरी इसे काफ़ी मह्त्त्वपूर्ण क़दम मानते हैं. उनके अनुसार इस दिशा में आगे जो भी प्रगति होगी वो तभी होगी जब आम लोग हर स्तर पर काम करना शुरू करें. उनका मानना है, "अगर इतने लोगों में दृढ़ता दिख रही है तो ये एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण क़दम माना जाना चाहिए." 'अमरीका की ज़िम्मेदारी' इस सहमति पत्र में मेयर निकल्स ने अपने सहयोगियों को याद दिलाया है कि अमरीका की जनसंख्या दुनिया के पाँच प्रतिशत से भी कम है मगर ग्लोबल वॉर्मिंग में उसका योगदान लगभग 25 प्रतिशत है फिर भी वो क्योटो संधि का हिस्सा नहीं है. दरअसल बुश प्रशासन का तर्क रहा है कि वो अनुसंधान में धन लगा रहा है और प्रौद्योगिकी के ज़रिए समस्या का समाधान निकाला जा सकता है. मगर डॉक्टर स्टीव हॉवर्ड इससे सहमत नहीं हैं. उनके अनुसार, "अगले 20-30 साल तक सिर्फ़ एक ऐसी जादुई प्रौद्योगिकी का इंतज़ार करना, जिससे सब ठीक हो जाएगा ग़लत है क्योंकि तब तक तो ज़हरीली गैसों का उत्सर्जन इतना होने लगेगा कि जलवायु में ज़बरदस्त परिवर्तन हो जाएगा इसलिए ज़रूरी ये है कि अभी ही उत्सर्जन कम करने की दिशा में काम किया जाए." मेयरों के इस समूह का मक़सद है अधिक से अधिक शहरों को अपने साथ लेना और शायद, हॉलीवुड की उसी फ़िल्म 'द डे आफ़्टर टुमॉरो' के उस संवाद की गूँज बुश प्रशासन के कानों तक पहुँचाने की अगर अभी कार्रवाई नहीं की गई तो फिर बहुत देर हो चुकी होगी. |
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