आप सोशल मीडिया एडिक्टेड तो नहीं?

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- Author, निकिता अमर झा
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी के लिए
ख़ुद को अपडेट रखने के लिए सोशल मीडिया से चिपके रहने वाले लोगों की आजकल कोई कमी नहीं है, लेकिन कहीं आपकी ये आदत किसी लत का रूप तो नहीं ले रही है.
मुंबई में मनोवैज्ञानिक डॉक्टर दयाल मीरचंदानी का कहना है, "यदि आपको वाईफाई न मिलने पर चिढ़ और गुस्सा आता है, तो आप सोशल मीडिया की लत के शिकार हैं और आपको इससे जल्दी निजात पा लेनी चाहिए."
ग्लोबल वेब इंडेक्स के अनुसार विश्वभर में 2.307 अरब आबादी सोशल मीडिया पर सक्रिय है.

डॉक्टर मीरचंदानी कहते हैं, "सोशल मीडिया एडिकशन, सामान्य एडिकशन की तरह है, जिस चीज़ का एडिकशन है, उसका अभाव महसूस होता है."
इससे किसी के टोकने पर आक्रामक हो जाना या फिर लोगों को नज़रअंदाज़ करना जैसे लक्षण स्वभाव में आ जाते हैं.
डॉक्टर मीरचंदानी कहते हैं, "कई बार हमारे पास ऐसे पेशेंट्स आते हैं, जिनके अंगूठे टाइपिंग करने से बुरी तरह सूज जाते हैं."
वे आगे कहते हैं कि बहुत सारे मरीज़ों की हालत 'रिपिटिव स्ट्रेन इंजरी' से संगीन हो जाती है.

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सोशल मीडिया के इस एडिकशन के बारे में एक अन्य मनोवैज्ञानिक डॉक्टर राजेंद्र बरवे कहते हैं, ''काल्पनिक दुनिया में हर बंधन और ज़िम्मेदारी से आज़ादी होती है, जो की असल ज़िंदगी में नहीं होती.''
बरवे आगे बताते हैं, "गुमनाम रहने और 'फेसलेस' रहने की आज़ादी की वजह से लोग सोशल मीडिया की तरफ आकर्षित होते हैं."
इसके नुक़सान को समझाते हुए कहते हैं कि धीरे-धीरे हम अपनी पूरी दुनिया अपने स्मार्ट्फोन तक ही समेट लेते हैं, जिससे अपने परिवार से कट जाते हैं.

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ऐसे में अब कई लोग न सिर्फ सोशल मीडिया के आदी हो रहे हैं बल्कि इसके जरिए अपराध के मामलों का भी पता चल रहा है.
मुंबई में पुलिस का कहना है कि साइबर क्राइम्स की गिनती एक साल में 37 से बढ़कर 286 तक पहुंच गई है.
हाल ही में एक आईटी प्रोफेशनल को मुंबई पुलिस से पकड़ा है, जो सारा दिन फ़ेसबुक पर नकली प्रोफाइल बनाकर अंजान लड़कियों को फ़्रेंड रिक्वेस्ट्स और फिर अश्लील मैसेजस भेजता था.

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मीरचंदानी सोशल मीडिया के इस्तेमाल की समय सीमा बताते हुए कहते हैं कि पूरे दिन में 4-5 घंटों के अंतराल पर एक बार सोशल मीडिया पर नज़र दौड़ाना अच्छा रहेगा.
इस एडिक्डिशन से अनिद्रा जैसी दिक़्कते भी आती हैं. इसलिए अपनी स्क्रीन पर ब्लू फिल्टर ज़रूर लगवा लें. रात में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलती नीली रोशनी हमारी आंखों के लिए घातक होती है.
वह कहते हैं कि रात में फोन का इस्तेमाल ना के बराबर ही करें, यहां तक कि अलार्म के लिए भी अलार्म क्लॉक ख़रीद लें.

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डॉक्टर बरवे की सलाह है कि घर में कुछ जगहों को फोन-फ्री रहने दें जैसे की खाने की टेबल, बेडरूम ताकि आप अपने परिवार के साथ समय बांट सकें.
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