ये दूरबीन रात में भी करेगी सूरज की पहरेदारी

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- Author, आभा शर्मा
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
राजस्थान के उदयपुर में फतेहसागर झील के बीच लगी इसरो की दूरबीन सूरज पर नज़र रखेगी.
ये देश की सबसे बड़ी सौर दूरबीन है.
बारह टन वज़न की करीब 18 करोड़ रुपये लागत वाली इस दूरबीन को जून में लगाया गया और हाल ही में इसका उद्घाटन हुआ है.
सौर दूरबीन ऐसी जगह लगी होनी चाहिए जहाँ हवा के तापमान के मुकाबले सतह का तापमान कम हो.
इस वजह से झीलों और तालाबों के बीच की जगह अच्छी समझी जाती है.
मास्ट (मल्टी एप्लीकेशन सोलर टेलीस्कोप) नाम की ये दूरबीन रात को भी सूरज की सतह का अध्ययन करने में सक्षम है.
यह विश्व के छह वैश्विक कंपन तंत्र समूहों (ग्लोबल ओसिलेशन नेटवर्क साइट्स) में से एक है जहाँ से सूर्य की गति पर चौबीसों घंटे नज़र रखी जाती है.
यहाँ से संगृहीत डाटा संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित राष्ट्रीय सौर वेधशाला में एकत्र किया जाता है.

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सूरज की अधिक दमक यानी फ़्लेयर से सेटेलाइट कम्यूनिकेशन और पॉवर ग्रिड पर असर पड़ता है.
इस दूरबीन की मदद से इस तरह के ख़तरों के बारे में पहले से पता चल सकेगा.
'मास्ट' को लगाने वाली वेधशाला के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर पी वेंकटकृष्ण ने बीबीसी को बताया, ”नई दूरबीन की बेहतर तकनीक से वातावरण में गैसों के मिश्रण से आने वाली रुकावटों का भी सूरज की किरणों के अध्ययन पर असर नहीं पड़ेगा.’’
देश का पहला एडेप्टिव ऑप्टिक्स यंत्र

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बेल्जियम में बनी 'मास्ट' दूरबीन से जुड़े सभी 'इमेजर, पोलारीमीटर और एडेप्टिव ऑप्टिक्स' वगैरह बैक एंड यंत्रों को उदयपुर की वेधशाला में ही तैयार किया गया है.
प्रोफेसर नंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि, "यह वायुमंडल की धुंध की वजह से सूरज की तस्वीरों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करेगा. इससे स्थिर और साफ़ तस्वीरें ली जा सकती हैं."
लेंस नहीं बल्कि मिरर

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इसी टीम के अन्य वैज्ञानिक ब्रजेश कुमार ने बताया, "पुरानी लेंस वाली दूरबीनों से अलग इसमें 50 सेंटीमीटर डाइमीटर का विशेष आइना लगा है जो अन्य आइनों की मदद से सूरज की किरणों को यंत्रों की तह तक पहुंचाने में मदद करेगा."
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