'प्रयोगशाला में बने ख़ून' का होगा परीक्षण

प्रयोगशाला में ख़ून का प्रयोग

इमेज स्रोत, THINKSTOCK

    • Author, जेम्स गैलाघर
    • पदनाम, स्वास्थ्य संपादक, बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट

ब्रिटेन का नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) अगले दो साल के अंदर प्रयोगशाला में बने रक्त का परीक्षण करेगा.

इस परीक्षण के लिए मूल कोशिकाओं (स्टेम सेल) से बड़ी मात्रा में नई रक्त कोशिकाएँ तैयार की जाएँगी.

'प्रयोगशाला में बने रक्त' की सुरक्षा जाँच के लिए क़रीब 20 लोगों को इसकी थोड़ी मात्रा चढ़ाई जाएगी.

एनएचएस ब्लड एंड ट्रांसप्लांट ने कहा है कि ये एक 'ऐतिहासिक क्षण' होगा. इससे एनीमिया जैसी बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी.

कृत्रिम रक्त उन बीमारियों में विशेष कारगर होगा जिनमें मरीजों के ब्लड ग्रुप से मैचिंग अच्छा रक्त नहीं मिलता.

एनएसएस पिछले कुछ सालों से रक्तदान करने वालों की कमी से जूझ रहा है.

स्वस्थ लोगों पर परीक्षण

रक्त परीक्षण

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES

ये परीक्षण यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिस्टल, कैम्ब्रिज और ऑक्सफ़ोर्ड मिलकर करेंगे. इसकी शुरुआत 2017 में होगी.

परीक्षण की शुरुआत में मरीजों के बजाय स्वस्थ लोगों को 5 से 10 मिलीलीटर(दो चम्मच से कम) कृत्रिम ख़ून चढ़ाया जाएगा.

ये मात्रा उस मात्रा से काफ़ी कम है जो एक यूनिट(470 मिली) में ख़ून चढ़ाने के दौरान मरीज को चढ़ाई जाती है.

एनएचएस ब्लड एंड ट्रांसप्लांट के डॉक्टर निक वाटकिंस ने कहा, "दुनिया भर के वैज्ञानिक लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण की विधि खोज रहे हैं ताकि मरीजो के इलाज के रक्तदान का विकल्प उपलब्ध हो सके."

रक्त की तुलना

रक्त की तुलना

इमेज स्रोत, PA

वाटकिंस ने बताया कि इन परीक्षणों के दौरान प्रयोगशाला में बने रक्त की तुलना किसी दाता से मिलने वाले रक्त से की जाएगी.

वाटकिंस ने कहा, "हमें भरोसा है कि 2017 तक हमारी टीम क्लिनिकल ट्रायल का शुरुआत कर सकेगी."

वो कहते हैं, "हम रक्तदान की जगह इसे नहीं लाना चाहते. हम ख़ास मरीजों के ख़ास इलाज के लिए इसका प्रयोग करना चाहते हैं."

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>