इसरो ने जीएसएलवी डी-5 रॉकेट का प्रक्षेपण टाला

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएलवी डी-5 रॉकेट का प्रक्षेपण कुछ तकनीकी कारणों से टाल दिया है.
इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रक्षेपण से कुछ मिनट पहले ही उन्हें रॉकेट के दूसरे चरण की ईंधन प्रणाली से रिसाव का पता चला जिसके बाद इसका प्रक्षेपण स्थगित कर दिया गया.
<link type="page"><caption> इनसेट-थ्रीडी का सफलतापूर्वक लॉन्च</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130726_isro_satellite_ra.shtml" platform="highweb"/></link>
देश में ही निर्मित उच्च स्तर के क्रायोजनिक इंजन से युक्त जीएसएलवी डी-5 का प्रक्षेपण भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था.
इसरो प्रमुख ने कहा है कि वे ईंधन प्रणाली से रिसाव के कारणों का मूल्याकंन करेंगे और इस काम के पूरा हो जाने के बाद ही प्रक्षेपण की नई तारीख के बारे में कुछ कहा जाएगा.
तीन साल पहले भी इसके प्रक्षेपण की एक कोशिश नाकाम हो गई थी.
15 अप्रैल 2010 को जीएसएलवी-डी3 के परीक्षण की कोशिशें टेस्ट के स्तर पर ही विफल हो गई थीं.
क्रायोजनिक इंजन

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसके साथ ही संचार उपग्रह जीसैट-14 का भी प्रक्षेपण होना था.
1982 किलो के उपग्रह के साथ इस रॉकेट का प्रक्षेपण सोमवार को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाना था.
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भारत को जीएसएलवी के प्रक्षेपण के लिए क्रायोजनिक इंजन की जरूरत है जिससे कि पाँच टन तक के वजन वाले उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए जा सकें. भविष्य की संचार आवश्यकताओं और अंतरिक्ष में मौजूद संभावनाओं के दोहन के लिए इसका सफलतापूर्व प्रक्षेपण महत्वपूर्ण था.
भारत की मौजूदा क्षमता फिलहाल डेढ़ टन के उपग्रहों के प्रक्षेपण की ही है.
जीसैट-14 का प्रमुख उद्देश्य संचार एव टेली-शिक्षा की दिशा में सेवाएँ उपलब्ध कराना था.
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