क्या कोई है, जो आपको ऑनलाइन परेशान कर रहा है?

क्या ऑनलाइन दुर्व्यवहार (अब्यूज़) की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सचमुच कुछ किया जा सकता है?
ऐसी घटनाओं से कई बार निजी ज़िदगी बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है और कुछ हादसों में लोगों को अपनी जान भी गवाँनी पड़ती है.
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अक्सर दिए जाने वाले कुछ सुझावों पर बीबीसी की रिपोर्ट-
1. रिपोर्ट अब्यूज़ बटन को शामिल कीजिए
महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली कैरोलीन-क्रीयाडो-पेरेस <link type="page"><caption> ट्विटर पर दुर्व्यवहार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130801_twitter_female_journalist_ap.shtml" platform="highweb"/></link> की सूचना देने के इंतजाम को “पूरी तरह से अपर्याप्त” बताती हैं.
ज़्यादातर लोगों की तरह उनका भी कहना है कि हर ट्वीट के साथ ही अब्यूज़ बटन को शामिल करना चाहिए, ताकि अपमानजनक बयान को आसानी से चिन्हित किया जा सके.
ट्विटर ने कहा है कि वह अपने पूरे सिस्टम में इस सुझाव पर अमल करेगा, जबकि कुछ ऐप्स में ऐसा पहले ही किया जा चुका है.
लेकिन हर पोस्ट के आगे रिपोर्ट अब्यूज़ बटन लगा देने से काम खत्म नहीं हो जाता है. मीडिया मनोवैज्ञानिक आर्थर कासिडी कहती हैं कि, “निश्चित रूप से अब्यूज़ बटन तो एक शुरुआत है.”
उन्होंने बताया, “लेकिन इतने से ही समस्या का समाधान नहीं होने जा रहा है. कार्रवाई की रफ्तार काफी धीमी है. यह पर्याप्त नहीं है.”
2. मशीन की मदद

<link type="page"><caption> फेसबुक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/06/130625_facebook_data_glitch_dil.shtml" platform="highweb"/></link> के मॉडरेटर हजारों की संख्या में हैं और दुनिया भर में फैले हुए हैं.
ऐसे में एक उपाए मशीनों की मदद लेना हो सकता है. ऐसी मशीनों को बनाया जा सकता है जो संभावित आपत्तिजनक संदेशों की पहचान करें और उन्हें भेजने से रोकने का काम करें.
यह मशीन कैसे काम करेगी? पहले से तय प्रतिबंधित शब्दों की सूची के आधार पर और इस सूची को लगातार अपडेट किया जाना चाहिए.
इसमें हालांकि एक दिक्कत है. एक मशीन के लिए बातचीत के संदर्भ को समझना काफी मुश्किल है. ऐसे में स्वचालित नियंत्रण गलत साबित हो सकता है.
3. असली पहचान का इस्तेमाल

इंटरनेट पर कई लोग अपनी वास्तविक पहचान को छिपाकर फर्जी नामों से संदेश भेजते हैं.
अपनी पहचान छिपाकर कई लोग सोचते हैं कि वो सजा से बच जाएंगे, हालांकि पुलिस और तकनीकी फर्म ऐसे किसी व्यक्ति की पहचान करने में सक्षम हैं.
फेसबुक इस बात पर काफी ध्यान देता है कि लोग अपने वास्तविक नाम का इस्तेमाल करें. जबकि ट्विटर निजता के तर्क के आधार पर ऐसा करने की अनुमति देता है.
चीन में प्रमुख सोशल नेटवर्किंग साइट पर खाता खोलने के लिए राष्ट्रीय पंजीकरण नंबर का ब्यौरा देना अनिवार्य है.
हालांकि कई बार वास्तविक पहचान को उजागर करना भी समस्या का कारण बन जाता है.
4. पुलिस का भरोसा
बीते दिनों इंटरनेट पर <link type="page"><caption> आपत्तिजनक ट्वीट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/07/130715_social_media_monitoring_pa.shtml" platform="highweb"/></link> के मामले में कई गिरफ्तारियाँ हुई हैं.
इस तरह पुलिस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि आप ऑनलाइन जो करते हैं, उसका आपके वास्तविक जीवन के साथ गहरा संबंध है.
ब्रिटेन में सार्वजनिक अभियोजन निदेशक केर स्टारमर ने बीते साल अक्टूबर में कहा था कि अगर इस बात को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश न हों कि पुलिस कब हस्तक्षेप कर सकती है, तो ऑनलाइन अभिव्यक्ति की आजादी पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है.
5. अधिक मॉडरेटर की नियुक्ति

आस्क डॉट एफएम और फेसबुक जैसी कई बड़ी कंपनियां मॉडरेटर नियुक्त करती हैं, जबकि बीबीसी सहित कई वेबसाइट ऐसी हैं जो मॉडरेटिंग की जिम्मेदारी बाहर की किसी विशेषज्ञ कंपनी को देती हैं.
तरीका चाहे जो भी हो लेकिन अधिक से अधिक मॉडरेटर का होना अच्छा है.
जो एन्नी कहती हैं कि बच्चों को ध्यान में रख कर बनाई गई साइट की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.
वर्ष 2010 में ट्विटर पर प्रतिदिन पांच करोड़ संदेश भेजे जा रहे थे, लेकिन कंपनी इतने अधिक खातों को करीब 300 कर्मचारियों के जरिए संभाल रही थी.
6. अच्छे बर्ताव की शिक्षा
अभिभावकों के साथ तकनीकी विषयों पर चर्चा करने वाली बेव साइट की संचालिका होली सेडन कहती हैं कि यह मसला हमारी संस्कृति में आ रहे बदलावों से जुड़ा है.
उन्होंने बताया कि, “अगर आप एक वेब साइट को बंद करेंगे तो दूसरी आ जाएगी. हम एक ऐसी स्थिति में आ गए हैं, जहाँ हम कंपनियों को दोष दे रहे हैं, लेकिन असल समस्या तकनीकी नहीं है- यह लोगों का बर्ताव है जिसे बदलने की ज़रूरत है.”
ऑनलाइन बर्ताव कैसे करें, इस बारे में लोगों को सिखाने की ज़रूरत है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












