वीडियो गेम्स से मोटापे का ख़तरा

वीडियो गेम्स

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टेलीविज़न देखने और साथ में खाते-पीते रहने की लत की वजह से मोटापा बढ़ने पर बहुत से शोध हुए हैं लेकिन एक नया शोध कहता है कि वीडियो और कंप्यूटर गेम भी बच्चों में मोटापे का ख़तरा बढ़ा रहे हैं.

इस शोध में कहा गया है कि वीडियो और कंप्यूटर गेम की वजह से बच्चों में आक्रामकता और हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ सकती है.

इस शोध के आंकड़े कहते हैं कि आठ से 18 वर्ष की उम्र के बहुत से बच्चे वीडियो गेम्स की लत के शिकार हो रहे हैं.

भारत की संस्था एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स (एसोचैम) के सोशल डवलपमेंट फ़ंड (एसडीएफ़) की ओर से किए गए शोध में कहा गया है कि इस लत की वजह से बच्चों में सामाजिकता में कमी, परिवार के सदस्यों से दूरी, स्कूल के कामों में दिलचस्पी घटने और दूसरे शौक का ख़त्म हो जाने का ख़तरा पैदा हो सकता है.

शोध

एसडीएफ़ की ओर से भारत के बड़े शहरों में अप्रैल से जून के बीच दो हज़ार बच्चों और नवयुवकों और क़रीब एक हज़ार अभिभावकों से बातचीत की गई.

इन शहरों में दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहर, मुंबई, चंडीगढ़, लखनऊ, अहमदाबाद, पटना, कोलकाता, चेन्नई, बंगलौर और जयपुर शामिल हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इन शहरों में लगभग 200 बच्चों और नवयुवकों और नवयुवतियों से बात की गई और 82 प्रतिशत से अधिक लोगों का कहना था कि वे हर हफ़्ते औसतन 14 से 16 घंटे वीडियोगेम्स या कंप्यूटर गेम्स खेलते हुए बिताते हैं.

एसडीएफ़ का कहना है कि जो बच्चे हफ़्ते में 20 से अधिक घंटे का समय वीडियोगेम्स और कंप्यूटर गेम्स खेलने में बिताते हैं उन्हें लती की श्रेणी में रखा गया.

इन बच्चों का कहना था कि अपने वे अकेले होते हैं तो वे आक्रामक और हिंसक खेल ज़्यादा खेलना पसंद करते हैं लेकिन माता-पिता की उपस्थिति में ऐसा करना संभव नहीं होता.

शोध में पाया गया कि इस तरह की लत लड़कों में ज़्यादा है और लड़कियों में कम है.

लत

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इमेज कैप्शन, वीडियो गेम्स की वजह से बच्चों का व्यवहार बदल रहा है

लड़कियों ने कहा कि वे सप्ताह के दिनों में औसतन 30 मिनट का समय वीडियो गेम्स में बिताती हैं और सप्ताहांत में एक घंटा लेकिन लड़के इसी दौरान औसतन 50 मिनट हर दिन और दो से तीन घंटे सप्ताहांत में वीडियो गेम्स खेलते हुए बिताते हैं.

लगभग 36 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने आपको वीडियो या कंप्यूटर गेम्स खेलने से नहीं रोक पाते.

शोधकर्ता चिंता के साथ कहते हैं कि शोध में शामिल आठ से 14 वर्ष के बच्चों में से 90 प्रतिशत बच्चे ऑनलाइन गेम्स खेलते हैं.

एसोचैम हेल्थ कमेटी के प्रमुख डॉ बीके राव ने एक स्थानीय अख़बार से हुई बातचीत में कहा, "वीडियो गेम्स खेलने का शौक एक लत में बदल सकता है और अभिभावकों को इस पर नज़र रखनी चाहिए कि बच्चे कितने घंटे वीडियो गेम्स खेल रहे हैं."

शोधकर्ता कहते हैं कि अभिभावक इस बात से चिंतित हैं कि ऑनलाइन गेम्स लगातार ख़राब होते जा रहे हैं क्योंकि वे बच्चों और नवयुवकों को गेम्स में शामिल होने की अनुमति देते हैं जिससे कि अनजान वयस्क लोगों से उनका लगातार संपर्क हो रहा है.