खसरे का ख़तरा क्या लौट आया है? जानिए 10 अहम सवालों के जवाब

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, गुलशन कुमार वनकर
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
जहाँ एक ओर कोरोना संकट कम होने के आसार हैं, वही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में खसरे का प्रकोप हो सकता है.
खसरा एक संक्रामक बीमारी है, और केवल पूर्ण टीकाकरण द्वारा ही इसे रोका जा सकता है.
लेकिन अगर खसरा हो गया है या फिर इसकी गंभीर आशंका हो तो हमें क्या करना चाहिए?
आम लोगों के मन में ऐसे कई सवाल पनप रहे हैं.
बीबीसी ने ऐसे दस सवालों को उनके जवाब के साथ समझने की कोशिश की है जो किसी के मन में खसरे को लेकर आ सकते हैं.

1. खसरा क्या है?
खसरा एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जो 'पैरामाइक्सोवायरस' नाम के विषाणु के संक्रमण से फैलता है.
यदि खसरे से पीड़ित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो व्यक्ति के थूक के कणों में वायरस आ जाते हैं और हवा में फैल जाते हैं. ये किसी स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं.
खसरे के लक्षण आमतौर पर दूसरे सप्ताह के भीतर आने शुरू हो जाते हैं. खसरे से पीड़ित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी खसरे का संक्रमण हो सकता है.
ये भी पढ़ें:-

2. खसरे के लक्षण क्या हैं?
बच्चों में इसके शुरुआती लक्षण हैं जुकाम, बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, आंखों में जलन, आंखें लाल होना.
पांच से सात दिनों के बाद शरीर पर लाल दाने निकल आते हैं. कई बार मुंह में सफेद दाग भी नजर आने लगते हैं.
3. लक्षण दिखने पर क्या करें?
खसरे के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ब्लड टेस्ट से रोग का पता चलने पर तुरन्त दवाई शुरू करें.
घरेलू नुस्खों के झांसे में न आएं, क्योंकि इससे बीमारी बढ़ सकती है और निमोनिया हो सकता है.
ये भी पढ़ें:-

4. खसरा किसे हो सकता है?
बिना टीकाकरण वाले बच्चों को खसरे का सबसे अधिक खतरा होता है.
उसके बाद, गर्भवती महिलाओं के भी खसरे से संक्रमित होने की बहुत संभावना होती है.
इसके अलावा, किसी भी ऐसे व्यक्ति को खसरा हो सकता है जिसने इसकी वैक्सीन न ले रखी हो.
5. खसरे का टीका क्या है? कितनी खुराक लेनी है?
बच्चों को खसरे के साथ साथ रूबेला की वैक्सीन, जिसे एमआर वैक्सीन के नाम से जाना जाता है, दो खुराक में दी जाती है.
पहली खुराक जब बच्चा नौ से 12 महीने की उम्र का होता है और दूसरी खुराक तब होती है जब बच्चा 16 से 24 महीने का हो जाता है.
ये भी पढ़ें:-

6. यदि बचपन में टीका लग चुका है, तो क्या मुझे इसे फिर से लगवाना चाहिए?
नहीं. यदि आपने एक बच्चे के रूप में टीके की दोनों खुराक ले रखी हैं तो आप जीवन भर के लिए खसरे से सुरक्षित हो जाते हैं.
7. विटामिन ए की खुराक क्यों ज़रूरी है?
जिन बच्चों में विटामिन ए की कमी होती है उनके खसरे से संक्रमित होने की संभावना अधिक रहती है.
इसके अलावा, जब संक्रमण हो जाता है तो शरीर में तरल पदार्थ की कमी हो जाती है, जिससे विटामिन ए का स्तर गिर जाता है.
यही कारण है कि खसरे के रोगियों को पौष्टिक आहार जारी रखते हुए विटामिन ए की एक खुराक दिन में दी जाती है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार इससे मृत्यु दर में भी कमी आई है.
ये भी पढ़ें:-

इमेज स्रोत, Getty Images
8. क्या नीम का पानी वाकई फायदेमंद है?
खसरे से संक्रमण में अक्सर दाने और बुखार के साथ खुजली भी होती है. इसलिए स्वाभाविक रूप से पहला घरेलू उपाय है - नहाने के पानी में नीम की पत्तियां डाल दें.
महाराष्ट्र में रोग सर्वेक्षण अधिकारी डॉक्टर प्रदीप आवटे कहते हैं, "इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. रोग वायरल है और लक्षण के रूप में इलाज किया जाता है.
लेकिन मवाद को बनने से रोकने के लिए, नींबू के पत्तों को एंटीसेप्टिक, कीटाणुनाशक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है."
ये भी पढ़ें:-
9. क्या खसरा वैश्विक महामारी है?
वर्तमान में खसरे की कोई वैश्विक महामारी नहीं है, लेकिन कई देशों में इसका प्रकोप देखा जा रहा है.
मुंबई में भी कुछ मौतें हुई हैं. इसका एक कारण यह भी है कि कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में में कई चीजें रुक गई थीं.
डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि लगभग चार करोड़ बच्चे खसरे के टीकाकरण से वंचित रह गए.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि खसरे से बचाव के लिए 95 प्रतिशत आबादी को टीकाकरण की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में यह दर दुनिया भर में 81 प्रतिशत तक कम हो गई है.
इन हालात में खसरे का प्रकोप व्यापक हो सकता है.
डॉक्टर प्रदीप आवटे कहते हैं, "महाराष्ट्र में टीकाकरण की स्थिति वर्तमान में अच्छी है, लगभग 90 प्रतिशत. लेकिन कुछ इलाकों में ये आंकड़ा औसत से कम है, इसलिए इसका प्रकोप है. देश के कई राज्यों में पिछले साल के मुकाबले पांच से छह गुना ज्यादा खसरे के मरीज देखे गए हैं. इसलिए इस समय राष्ट्रीय स्तर पर इस टीकाकरण अभियान को गति देने का काम चल रहा है."
ये भी पढ़ें:-
10. खसरा कितना खतरनाक है?
अतीत में, खसरे का प्रकोप हर दो से तीन साल में होता था और दुनिया भर में हर साल 26 लाख लोगों की मौत होती थी.
साल 1963 में खसरे के टीके की खोज के बाद दुनिया भर में टीकाकरण अभियान शुरू हुआ.
लेकिन अकेले 2021 में दुनिया भर में खसरे से 1 लाख 28 हज़ार लोगों की मौतें हुईं.
इसलिए यदि आप अपने बच्चे का, बच्चों का एमआर या एमएमआर का टीका लगवाने से चूक गए हैं, तो इसे अवश्य लगवाएं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)




















