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कोरोना: अगर कोविड पॉज़िटिव होने का शक है तो ये छह काम करें
- Author, एंड्री बेयरेथ
- पदनाम, बीबीसी ब्राज़ील
कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने धीर-धीरे पूरी दुनिया को अपनी ज़द में ले लिया है. दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला यह वैरिएंट अब दुनिया के सौ से अधिक देशों में पहुंच चुका है.
दुनिया के लगभग हर देश में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. यूरोप और अमेरिका के बाद अब एशियाई देशों में भी कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. अकेले भारत में बीते दो दिनों से कोरोना संक्रमण के मामले रोज़ाना एक लाख के आंकड़े को पार आ रहे हैं.
चार जनवरी को दुनिया में संक्रमितों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज की गई. महज़ चौबीस घंटों में कोरोना के बीस लाख से अधिक मामले रजिस्टर किए गए. ये वो मामले हैं जो रजिस्टर हुए, लेकिन कई मामले ऐसे होंगे जो अस्पतालों तक पहुंचे नहीं होंगे यान दर्ज नहीं किए गए होंगे. इस लिहाज़ से यह संख्या अधिक भी हो सकती है.
कई बार ऐसा होता है कि हमें संदेह होता है कि हम कोरोना पॉज़िटिव हो सकते हैं. हमें कोरोना के सारे लक्षण नज़र आ रहे होते हैं. ऐसे में हमें क्या करना चाहिए और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
इन छह बेहद आम लेकिन प्राथमिक रूप से ज़रूरी गाइडलाइन्स का पालन करते हुए आप अपनी सेहत का ध्यान रखने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी सुरक्षित रख सकते हैं.
1- डॉक्टर को खोजें
ब्राज़ीलियन सोसायटी ऑफ़ इंफ़ेक्शियस डिज़ीज़ के अध्यक्ष डॉ. जोस डेविड अरेबेइज़ ब्रितो मानते हैं कि कोविड की सही पहचान के लिए ज़रूरी है कि इसका टेस्ट करवाया जाए.
वह कहते हैं, "जैसे ही आपको सांस लेने में दिक़्क़त महसूस हो या सांस लेने के दौरान कुछ भी असामान्य लगे, मसलन, खांसी आना, नाक बहना, गले में ख़राश इत्यादि तो सबसे ज़रूरी होता है कि आप सही उपचार लें."
ऐसे में सबसे पहला काम टेस्ट करवाने का होना चाहिए. ताकि इस बात की पुष्टि हो सके की आपको कोरोना वायरस संक्रमण है या नहीं. या फिर ये सिर्फ़ मौसमी लक्षण हैं. कोई भी शख़्स इसके लिए एंटीजन या आरटीपीसीआर टेस्ट करवा सकता है.
अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हैं जो कोरोना पॉज़ीटिव था या हुआ है तो भी सबसे पहले कोरोना टेस्ट करवाकर इस ओर से निश्चिंत हो लें.
अमेरिका की सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन वेबसाइट के अनुसार, आरटीपीसार टेस्ट कराने का एक दूसरा फ़ायदा यह भी है कि अगर आपको कहीं यात्रा करनी है तो भी यह आपके लिए ज़रूरी है.
हालांकि एंटीजन टेस्ट आमतौर पर उतने सटीक नहीं होते हैं लेकिन यह ज़रूर है कि अगर आपको रिपोर्ट जल्दी चाहिए तो महज़ 15 से 30 मिनट में एंटीजन रिपोर्ट मिल जाती है.
वहीं दूसरी ओर आरटीपीसीआर टेस्ट को इस संदर्भ में सबसे सटीक माना जाता है, लेकिन इसकी रिपोर्ट आने में समय ज़रूर लगता है.
अगर टेस्ट का रिज़ल्ट निगेटिव आता है तो आप अपनी दिनचर्या को बनाए रख सकते हैं लेकिन उस स्थिति में भी सतर्कता बरतना ज़रूरी है. आपको मास्क पहनकर रखना चाहिए, किसी भी सतह को छूने से बचना चाहिए, घर से बाहर निकलें तो किसी भी व्यक्ति या वस्तु सं संपर्क में आने पर हाथों को सैनेटाइज़ करना चाहिए और संभव हो तो बार-बार बसाबुन से हाथ धोना चाहिए.
लेकिन वहीं दूसरी तरफ़ अगर रिपोर्ट निगेटिव आती है तो ज़रूरी है कि आप आगे दी हुई गाइडलाइन्स का पालन करना शुरू कर दें.
2- ख़ुद को आइसोलेट करें
कोरोना वायरस एक संक्रामक विषाणु है. ये वायरस ड्रॉपलेट्स या सलाइवा (थूक) के कणों के माध्यम से फैल सकता है.
अगर कोई संक्रमित शख़्स बिना मुंह पर रुमाल लगाए या मास्क लगाए छींक या खांस रहा है, और अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति बिना मास्क के या मुंह ढके उसके सामने खड़ा है या किसी और तरीके से उसके संपर्क में आता है, तो उस स्वस्थ व्यक्ति के संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाएगी.
ऐसे में अगर आप कोरोना संक्रमित हैं तो सबसे पहले अपने आसपास के लोगों का ख़याल करते हुए ख़ुद को उनसे दूर कर लें, यानी ख़ुद को आइसोलेट कर लें.
अगर आपके घर में आपके साथ परिवार भी रहता है तो ज़रूरी है कि परिवार के सभी सदस्य मास्क पहनकर ही रखें. मास्क अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए और उस समय मास्क पहने रहने पर का विशेष धयान देने की ज़रूरत है जब आप संक्रमित व्यक्ति के कमरे के ईर्द-गिर्द हों.
संभव हो सके तो संक्रमित शख़्स को अलग बाथरूम इस्तेमाल करने दें. साथ ही उसकी निजी ज़रूरत की चीज़ों को भी बाकी चीज़ों के साथ ना रखें.
इस बात को लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है कि किसी संक्रमित व्यक्ति को आख़िर कब तक आइसोलेशन में रहना चाहिए.
27 दिसंबर को अमेरिकी सीडीसी ने अपनी गाइडलाइंस में बदलाव करते हुए कहा कि पांच दिन का आइसोलेशन अनिवार्य है. हालांकि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया आदि दूसरे देशों में आइसोलेशन का वक्त अलग-अलग है. लेकिन औसतम सभी देशों में यह सात दिन से दस दिन तक का होता है. आइसोलेशन का पहला दिन लक्षण आने के समय से ही या फिर टेस्ट रिपोर्ट सामने आने बाद से ही गिनना शुरू कर देना चाहिए.
एसबीआई बायोसेफ़्टी कंसल्टेंट डॉ. सिल्विया लेमोस के अनुसार, "ओमिक्रॉन वैरिएंट और बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए दस दिनों तक आसोलेशन पीरियड में रहना बेहतर है."
लेकिन अगर नौवें दिन में भी संक्रमित शख़्स में लक्षण बने हुए हैं तो दस दिन या उससे अधिक दिनों तक आइसोलेशन में रहना चाहिए.
3- अपने आसपास के लोगों को सूचित करें
तीसरा ज़रूरी काम यह है कि आप अपने संपर्क में आए लोगों से अपने संक्रमित होने या संदेह होने की बात छिपाए नहीं बताएं.
आपके कोरोना पॉज़िटिव होने की ख़बर के सामने आने, लक्षण दिखाई देने या फिर टेस्ट रिपोर्ट आने के दिन से 14 दिन पहले के दरम्यान अगर आप किसी के भी संपर्क में आए हैं तो उन्हें इस बारे में बताएं और उन्हें टेस्ट कराने की सलाह दें.
बहुत हद तक संभव है कि आप, लक्षणों के सामने आने से पहले ही संक्रमित हो चुके हों.
आप बताने पर आपके आसपास के लोग लक्षणों के प्रति ज़्यादा सतर्क हो जाएंगे और कोविड टेस्ट भी करवाएंगे. इससे वे अपनी सुरक्षा तो पुख़्ता करेंगे ही, दूसरों के लिए भी संक्रमण का कारण नहीं बनेंगे.
4- लक्षणों को नियंत्रित करें
ज़्यादातर मामलों में कोरोना वायरस संक्रमित शख़्स को बुख़ार, खांसी, थकावट, गले में ख़राश, दस्त की शिकायत पेश आती है. कई मामलों में समय के साथ ये लक्षण बढ़ते जाते हैं.
कोरोन संक्रमित शख़्स जिस समय आइसोलेशन में हो उस दौरान सभी लक्षणों पर नज़र रखना बेहद ज़रूरी है. और अगर लक्षण गंभीर हो रहे हैं तो किसी तुरंत डॉकटर की मदद लेना ज़रूरी है.
हिंरिचसेन के मुताबिक़, "लक्षमों की निगरानी बहुत ज़रूरी है, ख़ासतौर पर बुज़ुर्ग मरीज़ों के मामले में. अगर किसी 60 साल के बुज़ुर्ग को अधिक दस्त होने लगे तो वह डिहाइड्रेटेड हो सकते हैं या फिर फेफड़ों में पानी जमा होने से उन्हें निमोनिया भी हो सकता है."
जानकार कहते हैं कि अगर घर में कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है तो बेहतर होगा कि घर में ऑक्सीमीटर हो, और समय समय पर व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल चेक किया जाए.
हिंरिचसेन के मुताबिक़, "ऑक्सीजन सेचुरेशन 95 फ़ीसद के ऊपर होना चाहिए. अगर ऑक्सीमीटर पर सेचुरेशन 98 फ़ीसद है, और अगर यह धीरे-धीरे 97%, 96%, 95% और 94% तक घट रहा है तो भी यह एक चेतावनी है कि आपको डॉक्टर की मदद लेने की ज़रूरत पड़ सकती है."
5- आराम करें और हाइड्रेटेडड रहें
बीबीसी ने जिन जानकारों से इस बारे में बात की है उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण के मामले में सबसे ज़रूरी है, सावधानी बरतना.
कोरोना महामारी बढ़ने के बाद से कुछ दवाइयां आउट ऑफ़ स्टॉक तक हो गयीं क्योंकि उन्हें इस बीमारी के उपचार के रूप में देखा गया. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, आइवरमेक्टिन और नाइटाज़ॉक्सानाइड जैसी दवाएं लोगों ने रोकथाम के तौर पर लीं लेकिन ये बहुत अधिक प्रभावी साबित नहीं हुईं.
मौजूदा समय में अगर कोई शख़्स कोरोना संक्रमित है तो जानकार उसे अधिक से अधिक आराम करने और अधिक से अधिक पानी पीने के लिए कहते हैं.
अरबिज़ ब्रितो के मुताबिक़, हाइड्रेटेड बॉडी साइटोकिन्स को डाइल्यूट करके किडनी के रास्ते बाहर निकालने में मदद करती है.
6- ठीक होने के बाद कोरोना वैक्सीन लें
कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद डॉक्टर की सलाह लेते हुए कोरोना वैक्सीन ज़रूर लगवाएं.
टीका लगवाना उन लोगों के लिए भी ज़रूरी है जिन्हें कोरोना संक्रमण हो चुका है. क्योंकि वैक्सीन एंटीबॉडी के लेवल को बढ़ाने में मददगार है.
हालांकि रिपोर्ट पॉज़ीटिव आने के अगले दिन ही वैक्सीन नहीं ली जानी चाहिए. जैसा कि ब्राज़ील में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि शुरुआती लक्षणों के नज़र आने या पॉज़िटिव होने के तीस दिन के बाद वैक्सीन ली जा सकती है.
जानकारों का कहना है कि वैक्सीन की हर डोज़ उसके शेड्यूल समय पर लेना बेहतर है.
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