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कोविड टो: कोरोना के कारण पैर के अंगूठे और उंगलियों पर क्यों हो रहा है असर
- Author, मिशेल रॉबर्ट्स
- पदनाम, हेल्थ एडिटर, बीबीसी
वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्हें इस बात का जवाब मिल गया है कि कोविड के कारण कई लोगों के पैर के अंगूठे और उंगलियों में घाव क्यों हो रहे हैं.
'कोविड टो' शरीर के कोविड से लड़ने के लिए अपनाए गए तरीके का साइड इफ़ेक्ट है.
शोधकर्ताओं का कहना कि उन्होंने पता लगा लिया है कि शरीर के प्रतिरोधक क्षमता के किस हिस्से के कारण ऐसा हो रहा है.
कोविड टो क्या है?
ये किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है लेकिन बच्चों और 20 साल से कम उम्र के लोगों में इसे ज़्यादा पाया गया है.
कुछ लोगों को दर्द नहीं होता लेकिन सूजन और खुजली होती है, जिससे दाने भी हो जाते हैं.
कोविड टो के लक्षण
स्कॉटलैंड की 13 साल की सोफ़िया को जब कोविड हुआ था तो उन्हें चलने में मुश्किल हो रही थी, वो जूते नहीं पहन पा रही थीं.
बीबीसी के 'द नाइन' प्रोग्राम में उन्होंने बताया कि उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा था.
आमतौर पर अंगूठे और लेकिन कई बार उंगलियों पर भी इसका असर होता है. वो लाल हो जाती हैं, कई बार नीली पड़ जाती हैं. त्वचा खुरदरी हो जाती और कई लोगों को तेज़ दर्द भी और सूजन होता है.
कुछ लोगों में ये महीनों तक चलता है, तो कई लोगों में कुछ हफ्तों में ठीक हो जाता है. कई मामलों में लोगों में आमतौर पर दिखने वाले कोविड के लक्षण नहीं होते जैसे बुखार, कफ़ या फिर स्वाद और गंध नहीं आना.
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कोविड टो क्यों होता है?
नई स्टडी के मुताबिक़, खून और त्वचा की जांच से पचा चलता है कि प्रतिरोधक क्षमता के दो हिस्से इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.
पहला एक एंटीवायरल प्रोटीन है जिसे टाइप1 इंटरफ़ेरॉन कहते हैं और दूसरा एक एंटीबॉडी है जो ग़लती से सिर्फ वायरस ही नहीं, व्यक्ति की कोशिकाओं और उत्तकों पर भी हमला कर देता है.
फ्रांस की पेरिस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक़ प्रभावित क्षेत्र की रक्त कोशिकाएं भी इसमें शामिल हैं.
शोधकर्ताओं ने कोविड टो का संभावित तौर पर शिकार 50 लोगों पर अध्ययन किया, इनमें से 13 में ये समस्या कोविड के कारण नहीं हुई थी, क्योंकि उनमें ये लक्षण महामारी शुरू होने के पहले देखे गए थे.
उम्मीद की जा रही है कि मिली जानकारी से मरीज़ों और डॉक्टरों को इस लक्षण को बेहतर समझने में मदद मिलेगी.
कोविड से जुड़ी त्वचा की दिक्कतें
ब्रिटेन के डॉक्टर इवाल ब्रिस्टो का मानना है अंगूठे में होने वाली इस तरह की मौसम से जुड़ी दिक्कतों की तरह ये भी खुद ही ठीक हो जाएंगे. हालांकि कुछ मामलों में क्रीम और दवाइयों से इलाज की ज़रूरत होगी.
उनके मुताबिक़, "कारण पता चल जाने से इलाज और बेहतर उपचार में मदद मिलेगी."
ब्रिटिश स्किन फाउंडेशन की प्रवक्ता वेरोनिक्यू बेटैली के मुताबिक ये लक्षण कोविड के शुरुआती दौर में ज़्यादा देखे गए थे और डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित लोगों में ये लक्षण कम हैं. टीकाकरण से बाद ये और कम हो सकते हैं.
उन्होंने कहा कि कोविड से जुड़ी त्वचा की दिक्कतें कई दिनों के बाद दिख सकती हैं और उन लोगों में भी जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे, इसलिए कोविड से इनके संबंध का पता लगाना मुश्किल होता है.
ब्रिटिश एसोशिएशन ऑफ़ डरमिटोलॉजिस्ट ने ऐसे लक्षणों की एक लिस्ट बनाई है.
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