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कुंभ की तरह कहीं कोरोना सुपर स्प्रेडर न बन जाए गंगासागर मेला? बढ़ रहा है अंदेशा
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से सशर्त अनुमति मिलने के बाद पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित सागरद्वीप में गंगासागर मेले की तैयारियां शुरू तो हो गई हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि कहीं ये आयोजन हरिद्वार कुंभ की तरह कोरोना का सुपर स्प्रेडर इवेन्ट न बन जाए.
इसकी वजह यह है कि राज्य में कोरोना संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है और इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार पहले ही 15 जनवरी तक कई पाबंदियों का एलान कर चुकी है.
खासकर प्रदेश की राजधानी कोलकाता और उससे सटे उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों की हालत सबसे गंभीर है. वहां रोजाना कोरोना संक्रमण के हजारों नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं. बंगाल में शनिवार को संक्रमण के क़रीब 19 हजार नए मामले सामने आए हैं.
मेले का औपचारिक उद्घाटन 10 जनवरी को होने वाला है. राज्य सरकार के अनुमान के मुताबिक़ 16 जनवरी तक चलने वाले इस मेले में इस साल पांच लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों के पहुंचने की संभावना है.
इस द्वीप पर गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है. इसके बारे में कहा जाता है कि 'सारे तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार.' हर साल देश-विदेश से लाखों लोग इस मेले में पहुंचते हैं. संगम में स्नान के बाद लोग वहां बने कपिलमुनि के मंदिर में दर्शन करते हैं.
हाईकोर्ट की सशर्त अनुमति
बंगाल में बढ़ते कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए एक डॉक्टर अभिनंदन मंडल ने गंगासागर मेला रद्द करने की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी.
इस पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा था कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गंगासागर मेले के आयोजन का फ़ैसला किया गया है. सरकार का कहना था कि मेले की तमाम तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं, इसलिए वह आख़िरी मौक़े पर मेला रद्द करने के पक्ष में नहीं है.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शुक्रवार को इस मेले के आयोजन की सशर्त अनुमति दे दी थी.
अदालत ने सरकार से मेला परिसर को 24 घंटे के भीतर अधिसूचित क्षेत्र घोषित करने के साथ ही मेले में निगरानी के लिए तीन-सदस्यीय समिति बनाने का निर्देश दिया.
मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति केडी भूटिया की खंडपीठ ने गृह सचिव को निर्देश दिया कि वो ये सुनिश्चित करें कि मेले के दौरान 16 जनवरी तक सरकार की ओर से घोषित पाबंदियों का सख्ती के पालन हो. तीन सदस्यीय समिति निगरानी रखेगी कि राज्य सरकार की ओर से लागू पाबंदियों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं. इसमें किसी कोताही या लापरवाही की स्थिति में समिति को मेला बंद करने की सिफारिश करने का भी अधिकार है.
अदालत के अनुसार सरकार को रोज़ाना विज्ञापन के ज़रिए लोगों को मेले में पहुंचने से होने वाले खतरों से आगाह भी करना होगा. सरकार किसी धार्मिक समारोह में एक साथ पचास से ज़्यादा लोगों के नहीं जुटने की पाबंदी पहले ही लागू कर चुकी है.
संशय और आशंका
हाईकोर्ट की सशर्त अनुमति के बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों और राजनीतिक दलों ने मेले के आयोजन से संक्रमण तेज़ी से बढ़ने का अंदेशा जताया है.
उनका कहना है कि बीते साल हरिद्वार में आयोजित कुंभ की तरह अब की बार गंगासागर मेला कोरोना का सुपर स्प्रेडर इवेन्ट साबित हो सकता है.
वेस्ट बंगाल डॉक्टर्स फोरम के सचिव डॉ. कौशिक चाकी कहते हैं, "यह वोट बैंक की राजनीति है. एक ओर सरकार सोशल डिस्टेंसिंग पर ज़ोर दे रही है तो दूसरी ओर मेले में पांच लाख लोगों के पहुंचने की बात कह रही है. बीते साल कुंभ मेला के बाद उपजे हालात हम देख चुके हैं. कहीं यह मेला सुपर स्प्रेडर न साबित हो."
वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अरिंदम विश्वास कहते हैं, "संक्रमण की मौजूदा परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए इस साल गंगासागर मेले का आयोजन रद्द कर देना चाहिए था. मेले से संक्रमण कई गुनी तेज़ी से बढ़ने का अंदेशा है." एक अन्य विशेषज्ञ डॉ कुणाल सरकार भी वोट बैंक से जोड़ते हुए इसे धर्म और राजनीति के घालमेल का नमूना बताते हैं.
सरकार का दावा
हालांकि राज्य सरकार ने मेले में कोरोना संक्रमण से सुरक्षा की व्यवस्था पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त होने का दावा किया है और कहा है कि कोरोना प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन किया जा रहा है.
आयोजन से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं, "मेले में कोरोना की जांच का इंतजाम है. वैक्सीन की दोनों डोज लिए बिना कोई भी मेला परिसर में नहीं पहुंच सकता. वहां 55 बिस्तरों वाला एक अस्थाई अस्पताल भी बनाया गया है. उसमें सीसीयू और आईसीयू के पांच-पांच बेड लगाए गए हैं. मेले में ज़रूरी संख्या में डॉक्टर और स्वस्थ्यकर्मी भी तैनात किए जा रहे हैं."
लेकिन डाक्टर्स फोरम के सचिव कौशिक सवाल करते हैं कि इतनी छोटी जगह में पांच लाख लोगों के जुटने की स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग कैसे संभव है?
संक्रमण की स्थिति
पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है. शनिवार शाम को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया कि बीते 24 घंटों के दौरान राज्य में संक्रमण के क़रीब 19 हज़ार नए मामले सामने आए और कोविड से 19 लोगों की मौत हुई है. अकेले राजधानी कोलकाता में सात हज़ार से नए मरीज़ मिले हैं.
अब राज्य के ज़्यादातर जिलों में भी संक्रमण बढ़ने लगा है. जिस दक्षिण 24 परगना जिले में गंगासागर मेला आयोजित हो रहा है वहां भी संक्रमितों की संख्या एक हज़ार के क़रीब पहुंच रही है.
लेकिन क्या मेले में आने वालों को संक्रमण का डर नहीं है? उत्तर प्रदेश के बस्ती से सपिरवार मेले में आने वाले अरविंद कुमार कहते हैं, "डर कैसा? हमने वैक्सीन ले ली है. अब यह नया कोरोना (ओमिक्रॉन वैरिएंट) उतना ख़तरनाक नहीं है. हम पुण्य का काम करने आए हैं. इसलिए कोरोना से डर नहीं लगता."
बिहार के सहरसा से आने वाले गौरीशंकर पांडे भी कुछ यही बात कहते हैं.
लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मेला 16 जनवरी तक चलेगा लेकिन उसका नतीजा कम से कम एक सप्ताह बाद सामने आ सकता है.
नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी डॉक्टर कहते हैं, "कहीं कुंभ की तरह यह मेला भी सुपर स्प्रेडर बन गया तो राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था का आधारभूत ढांचा चरमरा सकता है. पहले ही एक हज़ार से ज़्यादा डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं."
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