व्हाट्सऐप का नया फ़ीचरः बिना फोन के मैसेज भेजना मुमकिन होगा

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आपके लिए एक नया मैसेज है.
लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप एक नए फ़ीचर पर टेस्टिंग कर रहा है. अगर आपका स्मार्टफ़ोन आपके पास न भी हो तो आप इस फ़ीचर के जरिए मैसेज भेज सकेंगे.
फिलहाल व्हाट्सऐप यूज़र के स्मार्टफ़ोन से लिंक होता है. वेब और डेस्कटॉप वर्ज़न पर मैसेज रिसीव करने या भेजने के लिए स्मार्टफ़ोन को उससे कनेक्ट करना होता है.
लेकिन व्हाट्सऐप का ये नया फ़ीचर यूजर को बैटरी ख़त्म होने या फोन बंद होने की सूरत में भी मैसेजिंग सर्विज इस्तेमाल करने की सहूलियत देगा.
व्हाट्सऐप का कहना है कि यूजर इसे चार डिवाइसों जैसे पर्सनल कम्प्यूटर और टैबलेट में एक साथ इस्तेमाल कर सकेंगे.

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एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन
ये नया फ़ीचर फिलहाल टेस्टिंग फेज़ से गुजर रहा है और एक छोटे से समूह को ये सुविधा दी गई है ताकि वे इस पर अपना फीडबैक दे सकें और पब्लिक लॉन्चिंग से पहले इसमें ज़रूरी सुधार और कोई नई चीज़ जोड़नी हो तो ये किया जा सके.
व्हाट्सऐप के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी ख़ूबी है जिस पर उसका शुरू से ज़ोर रहा है. कंपनी ने बताया है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाला फ़ीचर नए सिस्टम में भी पहले की तरह काम करता रहेगा.
मैसेजिंग ऐप्स के मार्केट में व्हाट्सऐप पहला ऐप नहीं है जो ये फ़ीचर लॉन्च करने जा रहा है. सिग्नल जैसे दूसरे मैसेजिंग ऐप इस फ़ीचर से पहले से ही लैस हैं.
इसमें रजिस्टर करने के लिए फोन की ज़रूरत तो पड़ती है लेकिन मैसेज का आदान प्रदान करने के लिए फोन का पास होना ज़रूरी नहीं है.
दो अरब यूजर बेस वाली कंपनी व्हाट्सऐप का कहना है कि पब्लिक इसके लिए लंबे समय से मांग कर रही थी.

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प्राइमरी डिवाइस
फ़ेसबुक ने एक ब्लॉग पोस्ट में इस नए फ़ीचर के बारे में जानकारी दी है. कंपनी के इंजीनियर्स का कहना है कि इस बदलाव के लिए व्हाट्सऐप के सॉफ़्टवेयर को नए सिरे से डिजाइन करना पड़ा है.
कंपनी का कहना है, "ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि व्हाट्सऐप का मौजूदा वर्जन स्मार्टफ़ोन ऐप को प्राइमरी डिवाइस के रूप में इस्तेमाल करता है. यूजर डेटा का प्राइमरी सोर्स यही स्मार्टफ़ोन होता है और इसी डिवाइस पर कॉलिंग या मैसेजिंग सर्विस के लिए एंड-टू-एंड इन्क्रिप्शन वाला फ़ीचर भी काम करता है."
व्हाट्सऐप वेब और दूसरे नॉन-स्मार्टफ़ोन ऐप्स मिरर की तरह काम करते हैं, यानी जो फोन पर हो रहा होता है, उसे ही डेस्कटॉप या लैपटॉप के ब्राउज़र पर देखा जा सकता है.
लेकिन जो लोग इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं, उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जैसे वेब यूजर्स अक्सर ये शिकायत करते हैं कि उनका व्हाट्सऐप बार-बार डिसकनेक्ट हो जाता है.
इसका मतलब ये भी होता है कि व्हाट्सऐप आपके स्मार्टफ़ोन के बाहर एक बार में एक ही जगह पर एक्टिव रह सकता है. अगर आप किसी दूसरी डिवाइस पर इसे एक्टिव करेंगे तो पहले से सक्रिय वेब वर्जन डिस्कनेक्ट हो जाएगा.

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'आइडेंटिटी की'
लेकिन अब कंपनी का कहना है कि, "व्हाट्सऐप का नया फ़ीचर उसे एक से अधिक डिवाइस पर काम करने के लिए मौका देगा. इससे पुरानी बाधाएं दूर हो जाएंगी. इसे स्टार्ट करने के लिए स्मार्टफ़ोन की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी जबकि यूजर डेटा पहले की तरह स्टोर किया जा सकेगा और उसकी गोपनीयता भी बनी रहेगी."
फ़ेसबुक के इंजीनियरों ने इसके लिए एक तकनीकी रास्ता बनाया है. यूजर के प्रत्येक डिवाइस को एक 'आइडेंटिटी की' दी जाएगी और व्हाट्सऐप इसका रिकॉर्ड रखेगा कि कौन सी 'आइडेंटिटी की' किस यूजर के कौन से वाले डिवाइस की है.
इसका मतलब ये हुआ कि यूजर को अपने डेटा अपने ही डिवाइस में रखने की ज़रूरत नहीं रहेगी, इससे प्राइवेसी भंग होने का ख़तरा हो सकता है.
लेकिन एंटीवायरस कंपनी 'ईसेट' के डेटा सिक्योरिटी एनालिस्ट जैक मूर का कहना है कि सुरक्षा के चाहे कितने ही बंदोबस्त क्यों न कर लिए जाएं, एक से ज़्यादा डिवाइस पर मैसेज भेजना-मंगाना चिंता का सबब बन सकता है.
वे कहते हैं, "बुरे इरादों वाले लोग हमेशा रहेंगे. घर में परेशान करने वाले तत्व, पीछा करने वाले लोग इस नए फ़ीचर का इस्तेमाल प्राइवेट कम्यूनिकेशन में डिजिटल घुसैपठ करने की कोशिश करेंगे. इस फ़ीचर के अपने जोखिम हैं. यूजर की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वो इसके संभावित दुरुपयोग को कैसे रोके. उसे पता होना चाहिए कि उसके एकाउंट से कितने डिवाइस कनेक्टेड हैं."
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