हर नौ मिनट में ही क्यों रिपीट होता है अलार्म?

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इमेज कैप्शन, अलार्म घड़ी को हर नौ मिनट में बजने के लिए प्रोग्राम किया गया है

हर सुबह जब अलार्म बजता है तो आप उसे बंद कर देते हैं और सोचते हैं कि बस 'दस मिनट और'. आपको शायद नहीं पता कि वो दस मिनट नहीं बल्कि नौ मिनट होते हैं.

लेकिन नौ मिनट क्यों? इसका जवाब जानने के लिए हमें पिछले वक्त में जाना होगा, जब स्नूज़ बटन का आविष्कार किया गया था. स्नूज़ बटन की मदद से हम अलार्म को कुछ देर के लिए आगे बढ़ा सकते हैं. इस बटन का आविष्कार 50 के दशक में हुआ था.

जब बटन का आविष्कार हुआ था तब घड़ी के गियर की साइकल 10 मिनट की थी.

नौ मिनट ही क्यों?

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इमेज कैप्शन, जनरल इलेक्ट्रिक की बनाई गई घड़ियों में सबसे पहले 1956 में 'स्नूज़' बटन लगाया गया था, लेकिन 1959 में इसे लोकप्रियता मिली.

लेकिन स्नूज़ बटन के लिए गियर जोड़ने की वजह से दूसरे पुरजों का तालमेन ना बिगड़े इसके लिए विशेषज्ञों ने सलाह दी कि स्नूज़ गियर की साइकल 10 मिनट से ज्यादा या कम कर दी जाए.

आखिर में निर्माताओं ने इसे नौ मिनट करने का फैसला लिया.

हालांकि ये साफ नहीं है कि विशेषज्ञों ने नौ मिनट समय रखने का फैसला क्यों लिया. कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि 10 मिनट के बाद आप गहरी निंद में चले जाते हैं, ऐसे में अगर अलार्म दोबारा नहीं बजता तो आप शायद उठ नहीं पाएंगे.

इसका एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी बताया जाता है. कहा जाता है जो लोग अलार्म घड़ी का इस्तेमाल करते हैं उन्हें लगता है कि इसे स्नूज़ करने से वो कुछ देर और सो भी लेंगे और उनके समय की पाबंदी भी टूटेगी नहीं. यानी वो कुछ मिनटों में उठकर अपने काम पर निकल जाएंगे.

आप अलार्म बजने के कुछ समय बाद उठकर उसे आगे बढ़ाने के लिए बटन दबाते हैं. अलार्म बनाने वाले इंजीनियर्स का मानना है कि नींद में लोगों को कुछ पलों के अंतर का पता नहीं चलता. इसलिए उन्हें लगता है कि वे 10 मिनट के लिए अलार्म को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि वो होता नौ मिनट है.

स्नूज़ बटन की उपयोगिता

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डिजिटल घड़ी में भी अलार्म को 10 मिनट के बजाए 9 मिनट आगे बढ़ाना आसान था, क्योंकि गिनती एक ही संख्या में की जा सकती है.

बाद में जब स्मार्टफोन आए, तब स्नूज़ एप्लीकेशन बनाने वाले इंजीनियर्स ने इसकी साइकल को 9 मिनट ही रखा. इसे नौ मिनट रखने की वजह थी कि ये समय सीमा स्टैंडर्ड बन चुकी थी, वो चाहते तो इसे बदल भी सकते थे.

ज़्यादातर लोग अक्सर अलार्म बजने पर उसे बंद कर दोबारा सोने के आदी होते हैं. लेकिन जानकारों के मुताबिक स्नूज़ का बटन नींद खोलने का काम करता है. वो और ज़्यादा सोने का मौक़ा नहीं देता बल्कि इंसान को जगाने का काम करता है.

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स्नूज़ बटन दबाकर हम अपने सोने की साइकल को बार-बार रिसेट करते हैं. इससे भ्रम तो होता ही है, साथ ही नींद ना आने की समस्या भी हो जाती है.

जब हम दूसरी और फिर तीसरी बार अलार्म को आगे बढ़ाते हैं तो इससे नींद पूरी होने के बजाए कई बार थकान जैसा महसूस होता है.

इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि आपको तब का ही अलार्म लगाना चाहिए जब आप असल में उठना चाहते हैं.

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