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नागरिकों को मदद की पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने कहा है कि वो श्रीलंका में संघर्ष में फँसे हज़ारों नागरिकों को बाहर निकालने में मदद करने के लिए तैयार है. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने ये बयान दिया है. प्रणब मुखर्जी ने ये भी कहा है कि श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई ने पिछले 23 साल के संघर्ष में तमिलों का ख़ासा नुकसान किया है और अब ऐसी स्थिति है जब राजनीतिक प्रक्रिया को दोबारा शुरु कर सामान्य स्थित बहाल हो सकती है. प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में श्रीलंका के हालात पर बयान देते हुए कहा कि भारत आम तमिलों की सुरक्षा और देखरेख के बारे में चिंतित है. उन्होंने कहा कि एलटीटीई ने आम नागरिकों को मानव ढाल के रूप में भी इस्तेमाल किया है. प्रणब मुखर्जी ने कहा कि श्रीलंका में सेना बहुत आगे बढ़ी है उसने किलिनोची और एलिफ़ेंट दर्रे पर नियंत्रण कायम कर लिया है लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा और घायलों को संघर्ष वाले क्षेत्र से निकालना एक चिंता का विषय है. 'अखंड श्रीलंका में राजनीतिक हल' मुखर्जी का कहना था, "भारत अब भी अखंड श्रीलंका में समस्या का बातचीत के ज़रिए राजनीतिक समाधान खोजने के पक्ष में हैं जो तमिलों समेत सभी अल्पसंख्यक समुदायों को स्वीकार्य हो." लोकसभा में तमिल सांसदों की ओर से कुछ शोर के बीच उन्होंने कहा, "एलटीटीई भारत में प्रतिबंधित संगठन है और उसने श्रीलंका में तमिल समुदाय को काफ़ी नुकसान पहुँचाया है. श्रीलंका में 23 साल के बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई है जब राजनीतिक प्रक्रिया को दोबारा शुरु कर सामान्य स्थित बहाल हो सकती है." उनका ये भी कहना था कि भारत युद्ध क्षेत्र में फँसे हुए 70 हज़ार लोगों को वहाँ से बाहर निकालने के लिए सहयोग देने को तैयार है. प्रणब मुखर्जी के बयान के ख़त्म होने तक तमिल पार्टियों - एमडीएमके और पीएमके के सदस्यों ने ख़ासा शोर शुरु कर दिया और लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के बार-बार अनुरोध के बावजूद शोर होता रहा. लोकसभा अध्यक्ष को इसके बाद सदन की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा. |
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