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अस्पताल पर हमले में कई बच्चे मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि युद्धग्रस्त पूर्वोत्तर श्रीलंका में एक अस्पताल हमलों का निशाना बना है जिनमें बच्चों समेत कई लोग मारे गए हैं. यह अस्पताल मुलाईतिवु ज़िले में स्थित है. जिस इलाक़े में यह अस्पताल है वो तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के क़ब्ज़े में बचा एकमात्र इलाक़ा है. कोलंबो से संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता गोर्डन वीस ने बीबीसी को बताया कि अस्पताल में बच्चों के लिए बने वार्ड में कई गोले गिरे. उन्होंने बताया कि जिस समय गोलों से हमला हुआ उस समय अस्पताल में काफी भीड़ थी. संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने कहा कि हताहतों की सही संख्या का पता लगाने की कोशिश रही है. विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में यह एकमात्र अस्पताल बचा है जहाँ घायलों का इलाज हो रहा है.
उधर रेड क्रॉस ने अस्पताल को निशाना बनाए जाने पर गुस्से का इज़हार किया है. इसी अस्पताल के आस-पास लड़ाई से बचने के लिए हज़ारों लोगों ने शरण ली है. श्रीलंकाई सेना का कहना है कि वो नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए दी गई समयसीमा समाप्त होते ही कार्रवाई शुरु कर देगी. इस बीच श्रीलंका सरकार ने चेतावनी दी है कि 'विद्रोहियों से सहानुभूति जताने वाले' कूटनयिकों, सहायता एजेंसियों और पत्रकारों को निष्कासित किया जाएगा. सहायता एजेंसियों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र में फँसे लोग बुरे हाल में हैं और सैंकड़ों लोगों की जानें जा चुकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नागरिकों को छुड़ाएगी श्रीलंका सरकार'01 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'युद्धक्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चे प्रभावित'31 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस चेन्नई में श्रीलंकाई तमिलों के लिए प्रदर्शन30 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'घायलों को युद्ध क्षेत्र से निकालना शुरु'29 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस भारत का नागरिकों की सुरक्षा पर अनुरोध28 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें: मून27 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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