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'घायलों को युद्ध क्षेत्र से निकालना शुरु' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि श्रीलंका में घायल हुए सैकड़ों आम नागरिकों को लेकर उसके वाहनों का पहला काफ़िला युद्ध क्षेत्र को पार कर गया है. इसमें गंभीर रूप से घायल 50 बच्चे शामिल हैं. ये लोग श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के बीच उत्तरी श्रीलंका में चल रहे भीषण संघर्ष में घायल हुए थे. संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता गॉर्डन वेस ने कहा, "गंभीर रूप से घायल 50 बच्चों समेत सैकड़ों घायलों को वावूनिया शहर में स्वास्थ्य मंत्रालय के अस्पताल में ले जाया जा रहा है." संयुक्त राष्ट्र का काफ़िला पुथुकुडियिरुप्पु नगर में फँसा हुआ था और तीन दिन में अपनी दूसरी कोशिश में वह वहाँ से घायलों के बाहर निकालने में कामयाब रहा. गुरुवार को श्रीलंका सरकार ने रेड क्रास और संयुक्त राष्ट्र की इन रिपोर्टों का खंडन किया था कि देश के उत्तरी हिस्सों में संघर्ष के कारण मानवीय संकट पैदा हो रहा है. देश के रक्षा मंत्री गोटाभया राजपक्षा ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि उनकी नीति है कि 'किसी भी आम नागरिक की जान न जाए.' 'काफ़िले को नहीं रोका' उधर समाचार एजेंसियों के अनुसार एलटीटीई के राजनीतिक दफ़्तर ने सरकारी मीडिया के हवाले से दी गई उस ख़बर का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि उसने घायलों के ले जाते हुए संयुक्त राष्ट्र के किसी काफ़िले को रोका है. एलटीटीई के एस पुलीडेवन ने कहा, "असल में एलटीटीई बार-बार रेड क्रॉस से ये अनुरोध करता रहा है कि वह बिना विघ्न घायल नागरिक को यातायात उपलब्ध कराए, विशेष तौर पर उन्हें जिन्हें तत्काल मदद की ज़रूरत हैं. हमने उस क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया है." रेड क्रॉस का मानना है कि सेना और एलीटीई के बीच संघर्ष में सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं और लाखों अन्य संघर्ष वाले इलाक़े में फँसे हुए हैं. भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने हाल में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से कोलंबो में मुलाकात कर सरकार से आश्वासन माँगा था कि जो आम नागरिक इस संघर्ष के कारण उस क्षेत्र में फँस गए हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. श्रीलंका ने भारत को ऐसा आश्वासन भी दिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मुलईतिवु पर श्रीलंकाई सेना का क़ब्ज़ा'25 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों के अंतिम बचे गढ़ों पर हमला' 26 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस मुखर्ज़ी ने राजपक्षे के साथ की चर्चा27 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में 'मानवीय संकट' जैसी स्थिति27 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें: मून27 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस भारत का नागरिकों की सुरक्षा पर अनुरोध28 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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