BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 27 जनवरी, 2009 को 22:50 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
श्रीलंका में 'मानवीय संकट' जैसी स्थिति
श्रीलंका सेना
श्रीलंकाई सेना एलटीटीई के ख़िलाफ़ आर पार की लड़ाई छेड़े हुए है
अंतरराष्ट्रीय संस्था रेडक्रास का कहना है कि उत्तरी श्रीलंका में ज़बर्दस्त मानवीय संकट पैदा हो रहा है जहां कम से कम दस लाख लोग विद्रोहियों और श्रीलंकाई सेना के बीच संघर्ष में फंसे हुए हैं.

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास समिति ने अनुमान लगाया है कि एलटीटीई विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच संघर्ष में सैकड़ों आम नागरिक मारे जा चुके हैं.

रेड क्रास ने दोनों पक्षों से अपील की है जिन इलाक़ों में संघर्ष चल रहा है वहां मानवीय सहायता के लिए कार्यकर्ताओं को जाने दिया जाए.

उधर सेना का कहना है कि वो विद्रोहियों के ख़िलाफ़ आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं.

सेना एलटीटीई के आखिरी शहरी ठिकाने मुलईतिवु पर कब्ज़ा करने के बाद उत्तर पूर्व समुद्री तट को अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश कर रही है.

 हम यहां कम से कम लाखों लोगों की बात कर रहे हैं जो असल में क़रीब ढ़ाई सौ वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में सेना और विद्रोहियों के बीच फंसे हैं और वहां भयंकर गोलाबारी हो रही है
जैक्स डि मायो, रेड क्रास दक्षिण एशिया

अनुमति नहीं

इस संबंध में एलटीटीई से किसी बयान के लिए संपर्क नहीं साधा जा सका है. जिन इलाक़ों में संघर्ष हो रहा है वहां मीडिया को जाने की अनुमति बमुश्किल मिल रही है और ऐसे में सही स्थिति का अंदाज़ा नहीं लग पा रहा है.

जेनेवा में रेडक्रास के दक्षिण एशिया मामलों के प्रभारी जैक्स डि मायो का कहना था कि आम नागरिक इस खूनी संघर्ष का ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं.

उनका कहना था, '' हम यहां कम से कम लाखों लोगों की बात कर रहे हैं जो असल में क़रीब ढ़ाई सौ वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में सेना और विद्रोहियों के बीच फंसे हैं और वहां भयंकर गोलाबारी हो रही है.''

मायो का कहना था, '' असल में वो गोलियों का सामना कर रहे हैं और किसी भी पक्ष का निशाना बन सकते हैं. उनके पास कोई मेडिकल सुविधा नहीं है. उन्हें भोजन चाहिए, रहने की सुरक्षित जगह चाहिए और सुरक्षा चाहिए.''

रेड क्रास के आकड़े इस संकट के बाद श्रीलंका के स्थानीय अस्पतालों में पहुंच रहे घायलों और मारे गए लोगों की संख्या पर आधारित है.

संघर्ष वाले इलाक़ों में रेड क्रास की मौजूदगी नगण्य है और साथ ही किसी और राहत संस्था को भी इन इलाक़ों में जाने नहीं दिया गया है.

किलीनोच्चि
किलिनोच्चि जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों को नुकसान हुआ है

रेड क्रास का कहना है कि मंगलवार को वो 200 गंभीर रुप से घायल लोगों को बाहर निकालना चाहते थे लेकिन उन्हें इसके लिए सरकारी सेना से अनुमति नहीं दी गई.

इनमें से कई मरीज अब मौत के कगार पर हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव और यूरोपीय संघ ने संघर्ष में फंसे आम नागरिकों को लेकर गंभीर चिंता जताई है.

सेना मंगलवार को कुछ पत्रकारों को इन इलाक़ों में लेकर गई थी जिसमें बीबीसी संवाददाता भी थे.

मुलईतिवु पर कब्ज़ा करने वाली बटालियन का नेतृत्व करने वाले बिग्रेडियर नंदना उदावत्ते ने पत्रकारों को बताया पुत्तुक्कुडियिरुपु शहर के डेढ़ किलोमीटर की परिधि में दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलाबारी चल रही है.

उधर एलटीटीई समर्थक सूत्रों ने पूर्व में दावा किया था कि सरकारी सेनाओं ने कई आम नागरिकों को मारा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मुलईतिवु शहर में चप्पे चप्पे पर सैनिकों को छोड़ दें तो शहर किसी भुतहा स्थान जैसा लगता है जहां अधिकतर घर, इमारतें और दुकानें गोलीबारी का शिकार हुई हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
श्रीलंका में लड़ाई, संपादक पर हमला
23 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>