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सोमवार, 26 जनवरी, 2009 को 11:48 GMT तक के समाचार
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'विद्रोहियों के अंतिम बचे गढ़ों पर हमला'
श्रीलंकाई सैनिक (फ़ाइल फ़ोटो)
श्रीलंका सेना के करीब पचास हज़ार सैनिक अभियान में जुटे हैं
श्रीलंका सेना का कहना है कि रविवार को मुलईतिवु इलाक़े पर क़ब्ज़ा करने के बाद अब वो जंगलों में बाकी बचे अड्डों में विद्रोहियों से संघर्ष कर रही है.

सेना के मुताबिक वो इस क्षेत्र में आगे बढ़ रही है जहाँ अब भी विद्रोही मौजूद हैं. सेना कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल सरथ ने कहा है कि युद्ध 95 फ़ीसदी पूरा हो चुका है. लेकिन विद्रोहियों की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई है.

विद्रोहियों का समर्थक समझे जाने वाली वाली वेबसाइट तमिलनेट ने आरोप लगाया है सेना नागरिकों पर हमला कर रही है.

सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदया ननयक्कर ने कहा है कि सेना मुलईतिवु पर अपना नियत्रंण और पुख़्ता कर रही है और जंगली इलाक़ों में आगे बढ़ रही है.

उन्होंने बताया कि विद्रोही हथियारों और मोर्टार से हमला कर रहे हैं.

श्रीलंका के सेनाध्यक्ष ने रविवार को दावा किया था कि सेना ने तमिल विद्रोहियों के मुलईतिवु इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

तमिल विद्रोही पिछले 25 वर्षों से अलग राष्ट्र की माँग करते आए हैं. इस दौरान हुई हिंसा में अब तक करीब 70 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.

पत्रकारों को इस इलाक़े में जाने की अनुमति नहीं है. इसलिए ख़बरों की स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि नहीं हो पाई है.

अभियान

श्रीलंका में संघर्ष
1976-एलटीटीई का गठन
1987- भारतीय सैनिकों की श्रीलंका में तैनाती, 1990 में वापसी
1993-श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदासा की हत्या
2001-हवाईअड्डे पर हमले में आधे श्रीलंकाई विमान नष्ट
2002- सरकार और विद्रोहियों के बीच संघर्षविराम
2006- दोनों पक्षों के बीच दोबारा संघर्ष शुरु
2009- सेना का दावा कि मुलईतिवु,किलिनोची पर उसका क़ब्ज़ा

श्रीलंका सेना के करीब पचास हज़ार सैनिक अभियान में जुटे हुए हैं और समुद्री रास्ते से विद्रोही न निकलने पाएँ इसके लिए भी क़दम उठाए गए हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मुलईतिवु पर सेना के क़ब्ज़े के बाद विद्रोहियों का एक मुख्य अड्डा उनसे छिन गया है लेकिन दोबारा इकट्ठा होने की विद्रोहियों की शक्ति को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

इसके पहले श्रीलंका सरकार ने विद्रोहियों की तथाकथित राजधानी माने जानेवाले किलिनोची शहर पर भी कब्ज़ा कर लिया था.

वर्ष 2000 के बाद श्रीलंका सरकार का पहली बार पूरे जाफ़ना प्रायद्वीप पर नियंत्रण कायम हो गया है जिसे तमिल विद्रोहियों के लिए बड़ा धक्का माना जा रहा है.

मानवाधिकार संस्थाओं ने संघर्ष में फसे दो लाख पचास हज़ार नागरिकों की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. सरकार ने कहा है कि उसने लोगों के लिए सुरक्षित ज़ोन बनाया है. इस बीच तमिल विद्रोहियों के नेता प्रभाकरण का कोई अता-पता नहीं है.

इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रभाकरण भारत में तमिलनाडु पहुँचने की कोशिश कर सकते हैं. पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के सिलसिले में भारत को प्रभाकरण की तलाश है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि श्रीलंका सेना के अभियान का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि अगर भारत की केंद्र सरकार संघर्षविराम का समर्थन नहीं करती है तो उनकी पार्टी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी.

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