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श्रीलंका में आम जनता के लिए सुरक्षित ज़ोन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सेना ने पूर्वोत्तर इलाक़े के एक हिस्से को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया है ताकि तमिल विद्रोहियों के साथ जारी संघर्ष में आम जनता को नुकसान ना हो. सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानयक्कारा ने कहा कि तेज़ी से आगे बढ़ रही सेना 32 वर्ग किलोमीटर के सुरक्षित दायरे में गोलीबारी नहीं करेगी. उनका कहना था, "हमने विमानों से पर्चे गिराकर स्थानीय लोगों को इसके बारे में सूचित कर दिया है और हम रेड क्रॉस के ज़रिए भी ये सूचना दे रहे हैं." सहायता एजेंसियों का अनुमान है कि तमिल विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में लगभग ढाई लाख लोग रहते हैं. ये फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब विद्रोहियों के इलाक़े में काम कर रही एजेंसी ने बताया था कि हमलों में 18 आम नागरिक मारे गए हैं. हालाँकि श्रीलंका की सरकार ने इसका खंडन किया था और बीबीसी समेत मीडिया संगठनों की आलोचना की थी जिन्होंने इस ख़बर का प्रसारण किया था. फिलहाल सेना तमिल विद्रोहियों का गढ़ माने जाने मुल्लैतिवू को अपने क़ब्ज़े में लेने की कोशिश कर रही है. हालाँकि सुरक्षित ज़ोन पर विद्रोहियों की प्रतिक्रिया नहीं आई है. मानवाधिकार संगठनों और सहायता एजेंसियों ने कहा था कि संघर्ष वाले इलाक़े में आम लोगों की सुरक्षा को लेकर वे चिंतित हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'श्रीलंका ने विद्रोहियों की नौका नष्ट की'20 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस उत्तरी श्रीलंका में लड़ाई, हज़ारों विस्थापित 17 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'जाफ़ना पर श्रीलंका सेना का कब्ज़ा'14 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'श्रीलंका के 53 सैनिकों' को मारने का दावा05 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस दस साल बाद श्रीलंकाई सेना किलीनोची में02 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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