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सोमवार, 05 जनवरी, 2009 को 06:52 GMT तक के समाचार
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'श्रीलंका के 53 सैनिकों' को मारने का दावा
श्रीलंका के सैनिक
किलीनोची पर सरकारी सैनिकों के कब्ज़े को एलटीटीई के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है
श्रीलंका के तमिल विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने देश के उत्तर में श्रीलंका सेना के '53 सैनिकों' को मार डाला है.

हालांकी सेना की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है और सेना यह स्वीकार नहीं कर रही है कि एलटीटीई लड़ाकों के साथ संघर्ष में सेना के जवान बड़ी तादाद में हताहत हुए हैं.

विद्रोहियों के एक बयान में कहा गया है कि ये सैनिक मुलैतिवु जाने वाली मुख्य सड़क पर हो रही लड़ाई में मारे गए हैं, जिसे अब भी विद्रोहियों के कब्ज़े में माना जा रहा है.

उधर किलिनोच्चि की लड़ाई में सेना का नेतृत्व करने वाले मेजर जनरल जगतदास ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि वे विद्रोहियों के बाकी गढ़ों पर भी कब्ज़ा कर लेंगे.

पिछले सप्ताह सेना ने दावा किया था कि उन्होंने एलटीटीई लड़ाकों के गढ़ किलिनोच्चि पर कब्ज़ा कर लिया है.

समाचार एजेंसियों के हवाले से बताया जा रहा है कि दिन प्रतिदिन विद्रोहियों का अधिकार क्षेत्र कम होता जा रहा है और उनकी संख्या घटती जा रही है.

किलिनोच्चि पर कब्ज़ा

उन्होंने कहा, "इस युद्ध को समाप्त करने का उद्देश्य अब ज़्यादा दूर नहीं है."

सरकार ने दो दिन पहले घोषणा की थी कि उन्होंने विद्रोहियों के मुख्य गढ़ किलिनोच्चि पर कब्ज़ा कर लिया है.

 दिन प्रतिदिन विद्रोहियों का अधिकार क्षेत्र कम होता जा रहा है और उनकी संख्या घटती जा रही है.
मेजर जनरल जगत दास

रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि सेना अब मुलैतिवू की ओर बढ़ रही है जिसे विद्रोहियों का सैन्य मुख्यालय माना जाता है.

किलिनोच्चि का छिन जाना तमिल विद्रोहियों के लिए एक बड़ा आघात माना जा रहा है क्योंकि वहाँ उन्होंने एक समानांतर व्यवस्था कायम कर रखी थी.

श्रीलंका की सेना पिछले कई महीनों से किलिनोच्चि की तरफ़ बढ़ रही थी, यह इलाका लगभग एक दशक से तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण में था.

उत्तरी श्रीलंका में एक-दूसरे को भारी नुक़सान पहुँचाने के दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष सूत्रों से पुष्टि नहीं हो पाई है.

किलीनोच्चि पर सरकारी सैनिकों के नियंत्रण को एलटीटीई के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि दशकों तक उन्होंने इस पर अपना नियंत्रण रखा.

किलीनोच्चि को एलटीटीई की राजधानी माना जाता था. इसी शहर में तमिल विद्रोहियों ने अपने प्रशासनिक मुख्यालय का गठन किया था और यहीं से एक अलग राज्य की उनकी मांग तेज़ हुई थी.

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