|
उत्तरी श्रीलंका में लड़ाई, हज़ारों विस्थापित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरी श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है और हताहतों के बारे में परस्पर विरोधी खबरें आ रही हैं. उधर रेडक्रॉस ने इस लड़ाई के दौरान विस्थापित हुए हज़ारों लोगों की देखरेख के बारे में चिंता जताई है. तमिल विद्रोहियों की वेबसाइट के मुताबिक विद्रोहियों ने धर्मापुरम के पास सेना को खदेड़ दिया है और इस कार्रवाई में 50 से ज़्यादा सैनिक मारे गए हैं. लेकिन सेना ने इस दावे का खंडन किया है. उधर सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायाकारा ने बीबीसी को बताया है कि सेना ने विद्रोहियों को खदेड़ दिया है और बीस विद्रोही मारे गए हैं. उन्होंने ये भी कहा है कि सात सैनिक भी मारे गए हैं. श्रीलंका की सेना ने पिछले कई हफ़्तों से एलटीटी के कब्ज़े वाले इलाक़ों में भीषण सैन्य अभियान चलाया है और एलटीटीई विद्रोही अब उत्तर-पूर्वी तटवर्ती शहर मुल्लईटिवू में घिर गए हैं. दूसरी ओर भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंदा राजपक्षे से कोलंबो में बातचीत की है और इसमें देश के उत्तरी भाग में स्थिति पर चर्चा हुई है. हज़ारों का बार-बार पलायन अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था रेडक्रॉस के अनुसार भीषण जंग के कारण तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के कब्ज़े वाले इलाक़े में फँसे हुए हज़ारों लोगों को जान बचाने के लिए बार-बार एक जगह से दूसरी जगह भटकना पड़ा है और उनके लिए खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और चिकित्सा संबंधी समस्याएँ खड़ी हो गई हैं. रेडक्रॉस के अधिकारी पॉल कैसटेलो ने बीबीसी को बताया कि लड़ाई के कारण एक हफ़्ते से तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े में राहत सामग्री नहीं पहुँच पाई है जिससे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. लेकिन श्रीलंका के सैन्य प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा है कि खाद्य सामग्री से लदे वाहनों का एक काफ़िला विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े में भेजा गया है और वहाँ पर्याप्त खाद्य सामग्री मौजूद है. 'सुरक्षित रास्ते नहीं' रेडक्रॉस ने इस विषय पर भी चिंता जताई है कि दोनों पक्षों ने आम नागरिकों के बचकर निकलने के कोई 'सुरक्षित रास्तों' पर सहमति नहीं बनाई है. रेडक्रॉस के एक बयान में कहा गया है - "सुरक्षित रास्ते न होने के कारण उन मरीज़ों की जान के लिए ख़तरा पैदा हो गया है जिन्हें घटनास्थल पर उचित चिकित्सा नहीं दी जा सकती और जिन्हें वावूनिया में सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़े में अस्पताल में ले जाने की ज़रूरत है." बुधवार को श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि कुल 1707 लोगों ने जनवरी के दो हफ़्तों में सरकार के कब्ज़े वाले इलाक़ों में प्रवेश किया है जहाँ उन्हें आपात मदद और राहत सामग्री दी गई. रेडक्रॉस के अधिकारी पॉल कैसटेलो का कहना था, "बार-बार विस्थापन में कई बार लोगों को बार-बार अपने सब कुछ गँवाना पड़ा है और इसका असर साफ़ दिख रहा है." रेडक्रॉस के अनुसार पलायन करने वाले हज़ारों लोगों को इतने छोटे से इलाक़े में रखा गया है कि उनकी सुरक्षा और हालात के बारे में गंभीर चिंता पैदा हो गई है. |
इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका सेनाएं जाफ़ना के पास पहुंची05 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस एलिफ़ेंट पास पर सेना का कब्ज़ा: श्रीलंका09 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस संपादक की हत्या पर राजनीति गर्माई14 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में प्रमुख संपादक की हत्या08 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में अब लड़ाई मुलैतिवू के लिए03 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस दस साल बाद श्रीलंकाई सेना किलीनोची में02 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस संघर्ष में '90 श्रीलंकाई सैनिकों' की मौत 11 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका का अहम नगर पर कब्ज़े का दावा15 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||