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संपादक की हत्या पर राजनीति गर्माई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सरकार ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वह एक अख़बार के संपादक की हत्या के मामले को राजनीति चमकाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है. श्रीलंका सरकार में इंजीनियरिंग सेवा मंत्री रजित सेनारत्ने ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि पत्रकार की हत्या के पीछे कौन था लेकिन विपक्ष इसका फ़ायदा उठा रहा है. संडे लीडर नामक अख़बार के संपादक लसंथा विक्रमतुंगा की अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी थी. वो मौजूदा सरकार के मुखर आलोचक माने जाते थे. हत्या से कुछ दिनों पहले ही उन्होंने लेख लिखा था जिसमें सरकार की आलोचना की गई थी लेकिन यह लेख प्रकाशित नहीं किया गया था. लसंथा ने यह लेख विभिन्न अख़बारों को यह लेख भेजा था और साथ ही कहा था कि अगर उनकी मौत होती है तभी यह लेख प्रकाशित किया जाए. इस लेख में उन्होंने अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी. उन्होंने लिखा था, "अंत में अगर मैं मारा जाता हूँ तो दरअसल इसके पीछे सरकार होगी." लेकिन सरकार ने हत्या के पीछे किसी आधिकारिक एजेंसी का हाथ होने से इनकार किया है. इंजीनियरिंग मंत्री रजित सेनारत्ने का कहना था, "मैं नहीं कह सकता कि ये तमिल विद्रोहियों ने किया या किसी और ने. लेकिन इसका फ़ायदा किसे मिला..?" श्रीलंका सरकार ये कहती रही है कि उसकी छवि धूमिल करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश हो रही है और विक्रमतुंगा की हत्या का मामला इससे जुड़ा हुआ है. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में प्रमुख संपादक की हत्या08 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'श्रीलंका के 53 सैनिकों' को मारने का दावा05 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका सेनाएं जाफ़ना के पास पहुंची05 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस दस साल बाद श्रीलंकाई सेना किलीनोची में02 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस किलीनोची पर सरकारी सेना का क़ब्ज़ा02 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंकाई सेना को उत्तर में 'सफलता' 01 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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