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नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें: मून | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में जहाँ सेना जंगलों में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अब भी लड़ रही है वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने अपील की है राहतकर्मियों सहित आम लोगों की सुरक्षा तत्काल सुनिश्चित की जाए. समाचार एजेंसियों के अनुसार बान की मून ने श्रीलंका की सरकार से कहा, "राहतकर्मियों सहित आम नागरिकों की सुरक्षा को तत्काल और पूर्ण प्राथमिकता दी जाए. ये सुनिश्चित किया जाए कि विस्थापित लोगों समेत सभी के साथ अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के मुताबिक बर्ताव हो." उधर तमिल विद्रोहियों के राजनीतिक नेता बी नडेसन ने फ़ोन पर बीबीसी के साथ बातचीत में दावा किया, "वी प्रभाकरण के भाग जाने की रिपोर्टें केवल दुष्प्रचार है. हमारे नेता अब भी हमारे साथ श्रीलंका में हैं और स्वतंत्रता संघर्ष का नेतृत्व कर रहे हैं." रविवार को मुलईतिवु इलाक़े पर वर्ष 1996 के बाद नियंत्रण पाने के बाद सेना अब उस लगभग 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिस पर एलटीटीई का अब भी क़ब्ज़ा है. जब वर्ष 2006 में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष दोबारा शुरु हुआ था तब एलीटीई के कब्ज़े में लगभग 15 हज़ार वर्ग किलीमीटर का क्षेत्र था. राहत संस्थाओं के अनुसार लगभग ढ़ाई लाख लोग जंग वाले क्षेत्र से भागने की कोशिश में हैं लेकिन फँसे हुए हैं. 'आत्मसमर्पण नहीं, प्रभाकरण भागे नहीं' संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने वानी क्षेत्र में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई और सरकारी सेना के बीच जंग में फँसे आम लोगों की सुरक्षा के बारे में चिंता जताई है. सोमवार को संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि एलटीटीई के आख़िरी ठिकानों का सफ़ाया करने की सेना की कोशिशों के बीच 30 आम नागरिक मारे गए हैं . बान की मून ने कहा है कि दोनों पक्षों को सुरक्षित क्षेत्रों, अग्नि रहित क्षेत्रों और स्कूलों, अस्पतालों समेत अन्य नागरिक ढांचे को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए. उधर एलटीटीई के राजनीतिक नेता नडेसन ने कहा है कि तमिल विद्रोही तब तक आत्मसमर्पण नहीं करेंगे जब तक उन्हें अपने लोगों की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की गारंटी नहीं मिलती. जब उनसे पूछा गया कि एलटीटीई आत्मसमर्पण क्यों नहीं करेगा, तो उनका कहना था, "हमने अपने लोगों की हिफ़ाज़त के लिए हथियार उठाए थे. हमें आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और संप्रभुता से जीवन व्यतीत करने की गारंटी चाहिए....जब तक वह नहीं होता तब तक हम हथियार त्यागने की बात तक नहीं पहुँच सकते." जंग के मैदान में एलटीटीई को लगे धक्के पर उनका कहना था, "स्वतंत्रता की जंग में किसी सेना के लिए ज़मीन खो देने और फिर उसी पर दोबारा कब्ज़ा करना और स्वतंत्रता पाना सामान्य बात है. हम पहले भी कई बार पीछे हटे हैं और फिर विजयी होकर लौटे हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें 'मुलईतिवु पर श्रीलंकाई सेना का क़ब्ज़ा'25 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में लड़ाई, संपादक पर हमला23 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका की सेना का अहम केंद्र पर कब्ज़ा22 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में आम जनता के लिए सुरक्षित ज़ोन21 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'श्रीलंका ने विद्रोहियों की नौका नष्ट की'20 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस उत्तरी श्रीलंका पर भारत ने चिंता जताई18 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस उत्तरी श्रीलंका में लड़ाई, हज़ारों विस्थापित 17 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'जाफ़ना पर श्रीलंका सेना का कब्ज़ा'14 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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