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रविवार, 01 फ़रवरी, 2009 को 15:47 GMT तक के समाचार
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'नागरिकों को छुड़ाएगी श्रीलंका सरकार'
श्रीलंका की सेना
श्रीलंका की सेना ने कहा है कि वो तमिल विद्रोहियों के इलाक़े में फँसे आम नागरिकों को छुड़ाने के लिए अभियान चलाएगी.

संघर्ष वाले इलाक़े से नागरिकों को निकलने देने के लिए सरकार ने 48 घंटे का संघर्षविराम किया था. हाल ही में हुए भीषण संघर्ष के दौरान फँसे नागिरकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है.

अधिकारियों का कहना है कि पिछले 48 घंटों में करीब 300 नागरिक सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़े में आए हैं.

प्रवक्ता कहेलिया रंबुकवेला ने कहा, "अब हमें नागरिकों को बचाने के लिए अंदर जाना होगा. ये स्पष्ट हो गया है कि प्रभाकरण लोगों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. जब हम इलाक़े में जाएँगे तो नागरिकों की सुरक्षा का ख़्याल रखा जाएगा."

चेतावनी

सेना के अभियान के बाद विद्रोही जंगली इलाक़े में सिमट गए हैं जहाँ राहत एजेंसियों के मुताबिक ढाई लाख नागरिक हैं.

एजेंसियों का कहना है कि लोग बड़ी मुसबीत में हैं, सैकड़ों लोग संघर्ष में मारे गए हैं और खाद्य सामग्री की सप्लाई कम हो गई है.

सरकार का कहना है कि करीब एक लाख 20 हज़ार नागरिक फँसे हुए हैं और उसकी नीति है कि वो नागरिकों पर गोलीबारी नहीं करती.

श्रीलंका सरकार का आरोप है कि तमिल विद्रोही नागरिकों को निकलने नहीं दे रही और उन्हें मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. जबकि विद्रोहियों का कहना है कि नागरिक उनके संरक्षण में ही रहना चाहते हैं.

इन रिपोर्टों की पुष्टि नहीं हुई है क्योंकि दोनों ही पक्ष पत्रकारों को संघर्ष वाले इलाक़े में जाने की इजाज़त नहीं देते.

पिछले कुछ समय में श्रीलंका सेना ने विद्रोहियों के नियंत्रण वाले कुछ अहम इलाक़ों पर कब्ज़ा किया है जिसमें किलिनोची, मुलईतिवु और एलिफ़ेंट पास शामिल है.

सरकार की मंज़ूरी से जाफ़ना में हुए एक मीडिया दौरे में बीबीसी के अनबरसन भी शामिल थे. उन्होंने बताया है कि सरकार का समर्थन करने वाली तमिल पार्टी की रैली में हज़ारों लोग शामिल हुए और विद्रोहियों से कहा कि वो नागरिकों को जाने दें.

इस बीच श्रीलंका सरकार ने चेतावनी दी है कि वो ऐसे कूटनयिकों, राहत एजेंसियों और पत्रकारों को देश से बाहर निकाल देगी जो तमिल विद्रोहियों के पक्ष में नज़र आ रहे हैं. इसमें बीबीसी का नाम भी है.

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